अग्निदेव कहते हैं-
वसिष्ठ ! अब मैं भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले वार सम्बन्धी व्रतोंका वर्णन करता हूँ। जब रविवारको हस्त अथवा पुनर्वसु नक्षत्रका योग हो, तब पवित्र सर्वौषधिमिश्रित जलसे स्नान करना चाहिये। इस प्रकार रविवारको श्राद्ध करनेवाला सात जन्मोंमें रोगसे पीड़ित नहीं होता। संक्रान्तिके दिन यदि रविवार हो, तो उसे पवित्र 'आदित्य हृदय' माना गया है। उस दिन अथवा हस्तनक्षत्रयुक्त रविवारको एक वर्ष क नक्तव्रत करके मनुष्य सब कुछ पा लेता है। चित्रानक्षत्रयुक्त सोमवारके सात व्रत करके मनुष्य सुख प्राप्त करता है। स्वातीनक्षत्रसे युक्त मङ्गलवारका
व्रत आरम्भ करे। इस प्रकार मङ्गलवारके सात नक्तव्रत करके मनुष्य दुःख बाधाओंसे छुटकारा पाता है। बुध सम्बन्धी व्रतमें विशाखा नक्षत्रयुक्त बुधवारको ग्रहण करे। उससे आरम्भ करके बुधवारके सात नक्तव्रत करनेवाला बुधग्रहजनित पीड़ासे मुक्त हो जाता है। अनुराधानक्षत्रयुक्त गुरुवारसे आरम्भ करके सात नक्तव्रत करनेवाला बृहस्पति ग्रहकी पीड़ासे, ज्येष्ठानक्षत्रयुक्त शुक्रवारको व्रत ग्रहण करके सात नक्तव्रत करनेवाला शुक्रग्रहकी पीड़ासे और मूलनक्षत्रयुक्त शनिवारसे आरम्भ करके सात नक्तव्रत करनेवाला शनिग्रहकी पीड़ासे निवृत्त हो जाता है ॥ १-५॥
इस प्रकार आदि आग्नेय महापुराणमें 'वार सम्बन्धी व्रतोंका वर्णन' नामक एक सौ पंचानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ १९५ ॥
Summary of chapter 197 of the Agni Mahā Purana is as follows:
Vratas distinguished primarily by their duration in days are described. The Dhenu-vrata—one day of payo-vrata (milk-only diet) combined with go-dāna—leads directly to the paramapada. The Kalpa-vṛkṣa-vrata requires three days of payo-vrata and the gifting of a golden wish-fulfilling tree (kalpa-vṛkṣa) to a brāhmaṇa, earning the performer Brahma-loka for one hundred lineages. The Tri-rātra-vrata for Janārdana across three days yields Vaikuṇṭha along with liberation for one hundred genealogical lines. A four-day Kārtika sequence—daśamī pañcagavya, ekādaśī upavāsa, dvādaśī Viṣṇu-pūjā—is specified. Three types of kṛcchra-penance named Mahendra-kṛcchra, Bhāskara-kṛcchra, and Sāntapasa-kṛcchra are defined in terms of their daily dietary discipline.