241 - गरुड पुराणका माहात्म्य

भगवान्‌ हरिने कहा - हे रुद्र! मैंने ‘गरुड पुराण’का वह सारभाग आपको सुना दिया, जो भोग एवं मोक्ष प्रदान करनेवाला है। यह विद्या, यश, सौन्दर्य, लक्ष्मी, विजय और आरोग्यादिका कारक है। जो मनुष्य इसका पाठ करता है या सुनता है, वह सब कुछ जान जाता है और अन्तमें उसको स्वर्गकी प्राप्ति होती है।

ब्रह्मजीने कहा - हे व्यास! मैंने मुक्तिप्रदायक ऐसे महा पुराणको भगवान्‌ विष्णुसे सुना था।

व्यासजीने कहा - सूतजी! भगवान्‌ विष्णुसे इस महा पुण्यदायक गरुड पुराणको सुनकर ब्रह्माजीने दक्ष प्रजापति, नारद तथा हम सभीको सुनाया और स्वयं उस परात्पर ब्रह्मका ध्यान करते हुए वे वैष्णव पदको प्राप्त हुए। मैंने भी तुम्हें और तुमने शौनकादिको इस सर्वश्रेष्ठ पुराणको सुनाया, जिसे सुनकर सर्वज्ञ बना व्यक्ति अपने अभीष्टको प्राप्त करके अन्तमें ब्रह्मपदका लाभ लेता है। भगवान्‌ विष्णुने गरुडको सारतमभाग सुनाया था, इसलिये यह गरुडके लिये कथित सारतत्त्व ‘गरुड महापुराण’ के नामसे प्रसिद्ध हो गया। यह महा सारतत्त्व है। यह प्राणीको धर्म, काम, धन और मोक्षादि सभी फलोंको देनेवाला है।

सूतजीने कहा - हे शौनक! आपको मैंने उस श्रेष्ठतम गरुड महापुराणको सुना दिया है, जिस शुभ पुराणको भगवान्‌ व्यासने ब्रह्मासे सुनकर बहुत समय पहले मुझको सुनाया था। व्यासरूप भगवान्‌ हरिने प्रारम्भमें जो मात्र एक वेद था, उसे चार भागोंमें विभाजित किया और अष्टादश महा पुराणोंकी रचना की। उन पुराणोंको महाराज शुकदेवजीने मुझे सुनाया। हे शौनक! आपके पूछनेपर इस श्रेष्ठ गरुड पुराणको मैंने मुनियोंके सहित आपको सुनाया।

जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर इस महा पुराणका पाठ करता है, सुनता है अथवा सुनाता है, इसको लिखता है, लिखाता है, ग्रन्थके ही रूपमें इसे अपने पास रखता है तो वह यदि धर्मार्थी है तो उसे धर्मकी प्राप्ति होती है, यदि वह अर्थका अभिलाषी है तो अर्थ प्राप्त करता है। यदि वह कामी है तो उसकी कामनाएँ पूर्ण होती हैं और यदि वह मोक्ष प्राप्त करनेका इच्छुक है तो उसे मोक्ष प्राप्त होता है। मनुष्य जिस - जिस वस्तुकी कामना करता है, वह सब इस गरुड महापुराणको सुननेसे प्राप्त हो जाता है। जो मनुष्य इस महा पुराणका पाठ करता है, वह अपने समस्त अभीष्टको सिद्ध करके अन्तमें मोक्ष प्राप्त कर लेता है। इस पुराणके एक श्लोकका एक चरण भी पढ़कर मनुष्य पापरहित हो जाता है। जिस व्यक्तिके घरमें यह महापुराण रहता है, उसको इसी जन्ममें सब कुछ प्राप्त हो जाता है। जिस मनुष्यके हाथमें यह गरुड महापुराण विद्यमान है, उसके हाथमें ही नीतियोंका कोश है। जो प्राणी इस पुराणका पाठ करता है या इसको सुनता है वह भोग और मोक्ष दोनोंको प्राप्त कर लेता है।

इस महा पुराणको पढ़ने एवं सुननेसे मनुष्यके धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - इन चारों पुरुषार्थोंकी सिद्धि हो जाती है। इस महापुराणका पाठ करके या इसे सुन करके पुत्रार्थी पुत्र, कामार्थी काम, विद्यार्थी विद्या, विजिगीषु विजय प्राप्त कर लेता है तथा ब्रह्म हत्यादिसे युक्त पापीका पाप नष्ट हो जाता है, वन्ध्या स्त्री पुत्र, कन्या सज्जन पति, क्षेमार्थी क्षेम तथा भोग चाहनेवाला भोग प्राप्त कर लेता है। इसी प्रकार मङ्गलकी कामनासे प्रेरित व्यक्ति अपना मंगल, गुणोंका इच्छुक व्यक्ति उत्तम गुण, काव्य करनेका अभिलाषी मनुष्य कवित्वशक्ति, सारतत्त्व चाहनेवाला सार, ज्ञानार्थी ज्ञान प्राप्त करता है।

पक्षिश्रेष्ठ गरुडके द्वारा कहा गया यह गरुड महापुराण धन्य है। यह सबका कल्याण करनेवाला है। जो मनुष्य इस महा पुराणके एक भी श्लोकका पाठ करता है, उसकी अकालत मृत्यु नहीं होती। इसके मात्र आधे श्लोकका पाठ करनेसे निश्चित ही दुष्ट शत्रुका क्षय होता है। नैमिषारण्यमें ऋषियोंके द्वारा आयोजित यज्ञमें सूतजी महाराजसे इस महा पुराणको सुन करके स्वयं शौनक मुनिने उन्हीं गरुडध्वज भगवान्‌ विष्णुकी कृपासे मुक्तिका लाभ प्राप्त किया था।