अवन्ती-महाकालवनके तीर्थोंकी महिमा

मोहिनी बोली- विप्रवर! आपने नर्मदाका जो माहात्म्य बताया है, यह मनुष्योंके पापका नाश करनेवाला है। महाभाग! प्रभो! अब मुझे अवन्तीतीर्थका तथा देववन्द्य भगवान् महाकालका माहात्म्य बताइये।

पुरोहित वसुने कहा- भद्रे! सुनो, मैं तुम्हें अवन्तीका माहात्म्य बतलाता है, जो मनुष्योंको पुण्य देनेवाला है। महाकालवन पवित्र एवं परम उत्तम तपोभूमि है। महाकालवनसे दूसरा कोई क्षेत्र इस पृथ्वीपर नहीं है। वहाँ कपालमोचन नामक तीर्थ है जिसमें भक्तिपूर्वक स्नान करनेसे ब्रह्महत्यारा मनुष्य भी शुद्ध हो जाता है। रुद्र-सरोवरमें स्नान करनेवाला मानव रुद्रलोकमें प्रतिष्ठित होता है। स्वर्गद्वारमें जाकर स्नान और भगवान् सदाशिवकी पूजा करनेवाला मनुष्य कभी दुर्गतिमें नहीं पड़ता; वह स्वर्गलोकमें पूजित होता है। राजस्थलमें जाकर सामुद्रिकतीर्थ में नहानेवाला मनुष्य सब तीर्थों में स्नान करनेका उत्तम फल पाता है। शङ्करवापीमें नियमपूर्वक स्नान करनेवाला मानव इहलोकमें मनोवाञ्छित भोग भोगकर अन्तमें रुद्रलोकमें जाता है। जो मनुष्य नीरगङ्गामें नहाकर भक्तिभावसे गन्धवतीदेवीको पूजा करता है, वह सब पापोंसे मुक्त हो जाता है।

दशाश्वमेधिक-तीर्थमें स्नान करनेसे अश्वमेध-यज्ञका फल मिलता है। तदनन्तर मनुष्य देवेश्वरी एकानंशाके समीप जाकर गन्ध-पुष्प आदिसे उनकी पूजा करके सम्पूर्ण कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। जो मानव रुद्रसरोवरमें स्रान करके श्रद्धापूर्वक हनुमत्केश्वरका पूजन करता है, वह सम्पूर्ण सम्पत्तियोंको पा लेता है। वाल्मीकेश्वरकी पूजा करनेसे मानव सम्पूर्ण विद्याओंकी निधि होता है। पशेश्वरकी पूजा करनेसे मानव समस्त सिद्धियोंका भागी होता है। कुशस्थलीको परिक्रमा करनेसे मनोवाञ्छित फलकी प्रासि होती है। मन्दाकिनीमें गोता लगानेसे गङ्गा-नानका फल मिलता है। अङ्कपादका पूजन करके मनुष्य भगवान् शिवका अनुचर होता है। यज्ञवापीमें स्नान और मार्कण्डेयेश्वरका पूजन करनेसे सम्पूर्ण यज्ञोंका फल पाकर मनुष्य एक युगतक स्वर्गमें निवास करता है। सती मोहिनी। सोमवती अमावास्याको सान और सोमेश्वरका पूजन करके मनुष्य इहलोक और परलोकमें मनोवाञ्छित भोग पाता है। फिर केदारेश्वर, रामेश्वर, सौभाग्येश्वर तथा नगरादित्यकी पूजा करके मनुष्य मनोवाञ्छित फल पाता है। केशवादित्यकी पूजा करनेसे मानव भगवान् केशवका प्रिय होता है। शक्तिभेद-तीर्थम खान करके बड़े भयंकर संकटोंसे छुटकारा मिल जाता है। जो मनुष्य ॐकारेश्वर आदि लिङ्गोंकी विधिपूर्वक पूजा करता है, वह भगवान् महेश्वरके प्रसादसे सम्पूर्ण कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। देवि! महाकालवनमें शिवलिङ्गोंकी कोई नियत संख्या नहीं है। जहाँ-कहीं भी विद्यमान शिवलिङ्गका पूजन करके मनुष्य भगवान् शङ्करका प्रिय होता है। अवन्तीके प्रत्येक कल्पमें भिन्न-भिन्न नाम होते हैं। यथा-कनकशृङ्गा, कुशस्थली, अवन्तिका, पद्मावती, कुमुद्वती, उज्जयिनी, विशाला और अमरावती। जो मनुष्य शिप्रा नदीमें स्नान करके भगवान् महेश्वरका पूजन करता है, वह महादेवजी तथा महादेवीकी कृपासे सम्पूर्ण कामनाओंको पा लेता है। जो वामनकुण्डमें स्रान करके 'विष्णुसहस्त्रनामस्तोत्र के द्वारा सम्पूर्ण देवताओंके स्वामी भगवान् श्रीधर (विष्णु)-की स्तुति करता है, वह इस पृथ्वीपर साक्षात् श्रीहरिके समान है। जो देवप्रयाग-सरोवरमें मान करके भगवान् माधवकी आराधना करता है, वह भगवान् माधवकी भक्ति पाकर विष्णुधाममें जाता है। जो अन्तर्गृहकी यात्रामें विघ्नेश, भैरव, उमा, सदादित्य तथा अन्यान्य देवताओंकी श्रद्धापूर्वक प्राप्त उपचारोंसे पूजा करता है, वह स्वर्गलोकका भागी होता है। भामिनि! रुद्रसरोवर आदि स्थलोंमें जो अन्य बहुत-से तीर्थ हैं उन सबमें भगवान् शङ्करकी पूजा करके मनुष्य सुखी होता है। वहाँके आठ तीर्थोंमें स्नान करके मानव महाकालवनकी यात्राका साङ्गोपाङ्ग फल पाता है। इस प्रकार अवन्तीपुरीका यह सब माहात्म्य तुम्हें बताया गया है। इसे सुनकर मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है।