नारद महा पुराण
सेतु-क्षेत्रके विभिन्न तीर्थोंकी महिम
मोहिनी बोली- द्विजश्रेष्ठ! आपको बार-बार साधुवाद है। क्योंकि आपने मुझे पूरी रामायणकी कथा सुना दी, जो मनुष्यों के समस्त पापोंका नाश और उनके पुण्यको वृद्धि करनेवाली है। अब मैं आपसे सेतु (सेतुबन्ध रामेश्वर)-का उत्तम माहात्म्य सुनना चाहती हूँ।
पुरोहित वसुने कहा-देवि ! सुनो, मैं तुम्हें उस सेतुका उत्तम माहात्म्य बतलाता है, जिसका
दर्शन करके मनुष्य संसार-सागरसे मुक्त हो जाता है। सेतुतीर्थका दर्शन परम पुण्यमय है, जहाँ भगवान् रामेश्वर विराजमान हैं। वे दर्शनमात्रसे मनुष्योंको अमरत्व प्रदान करते हैं। जो मनुष्य अपने मनको वशमें करके श्रीरामेश्वरका पूजन करता है, वह समस्त ऐश्वौका भागी होता है। यहाँ दूसरा चक्र-तीर्थ भी है, जो पापोंका नाश करनेवाला है। वहाँ नान, दान, जप और होम
करनेपर वह अनन्तगुना हो जाता है। सुभगे ! यहाँसे पापविनाशनतीर्थमें जाकर खान करनेसे मनुष्यके सारे पाप धुल जाते है और वह स्वर्गलोकमें प्रतिष्ठित होता है। इसके बाद सीताकुण्डमें जाकर वहाँ भलीभांति स्नान करके जो देवताओं और पितरोंका तर्पण करता है, वह समस्त कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। फिर मङ्गलतीर्थमें जाकर वहाँ स्नान करनेसे मनुष्य पापमुक्त होता है। अमृतवापीतीर्थ में नान करके मरणधर्मा मानव अमरत्व प्राप्त कर लेता है। ब्रह्मकुण्डमें स्नान करनेसे मनुष्यको ब्रह्मलोककी प्राप्ति होती है। ' लक्ष्मणतीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्य योगगति पाता है। हनुमत्-कुण्डमें स्नान करके मनुष्य शत्रुओंके लिये दुर्जय हो जाता है। रामकुण्डमें स्रान करनेवाला मानव श्रीरामका सालोक्य प्राप्त करता है। अग्रितीर्थमें नान करके मनुष्य सब पापोंसे छूट जाता है। शिवतीर्थ में स्नान करनेसे शिवलोककी प्राति होती है। शङ्कतीर्थ में स्नान करनेवाला मनुष्य दुर्गतिमें नहीं पड़ता। कोटितीर्थमें गोता लगाकर मानव सम्पूर्ण तीर्थीका फल पाता है। धनुष्कोटितीर्थम विधिपूर्वक स्नान करनेवाला पुरुष बन्धनोंसे मुक्त हो जाता है। गायत्री तथा सरस्वतीतीर्थ में स्नान करनेवाला पुरुष पापसे मुक्त हो जाता है। ऋणमोचनतीर्थ आदिमें स्नान करके मनुष्य सब प्रकारके ऋणसे छूट जाता है। शुभे! इस प्रकार मैंने सेतु (सेतुबन्ध रामेश्वर)-के तीर्थोंका माहात्म्य बताया है, जो पढ़ने और सुननेवाले पुरुषोंके सब पापोंका नाश कर देता है।