मह्रेश्वरोक्त पाप प्रशमन-स्रोत

पुलस्त्य उवाच ।

नमस्तेऽस्तु जगन्नाथ देवदेव नमोऽस्तु ते ।

वासुदेव नमस्तेऽस्तु बहुरूप नमोऽस्तु ते ॥ १

एकभृङ्ग नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं वृपाकपे।

श्रीनिवास नमस्तेऽस्तु नमस्ते भूतभावन । २

विष्वक्सेन नमस्तुभ्यं नारायण नमोऽस्तु ते ।

ध्रुवध्वज नमस्तेऽस्तु सत्यध्वज नमोऽस्तु ते ॥ ३

यज्ञध्वज नमस्तुभ्यं धर्मध्वज नमोऽस्तुते ।

तालध्वज नमस्तेऽस्तु नमस्ते गरुडध्वज ॥४

वरेण्य विष्णो वैकुण्ठ नमस्ते पुरुषोत्तम ।

नमो जयन्त विजय जयानन्त पराजित ।। ५

कृतावर्त महावर्त महादेव नमोऽस्तु ते ।

अनाधाधन्त मध्यान्त नमस्ते पमजप्रिय ॥६

पुरंजय नमस्तुभ्यं शत्रुजय नमोऽस्तु ते ।

वहाँ पुरपोत्तम जगन्नाथ की आराधना कर समस्त पापों से मुक्त होकर उसने विष्णुलोक शाप्त किया। (११९)

हे ब्रह्मन् ! मैंने तुमसे विप्रमुखस्य सरस्वती द्वारा सम्यक्त्या कथित विष्णु का यह सारस्वत स्तोत्र कहा। (१२0)

यासुदेव के इस श्रेष्ठ स्तोत्र को पढ़ने वाला मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जायेगा। (१२१)

श्रीवामनपुराण में उनसठवाँ अध्याय समास ॥५६ ।।

६0

पुलस्त्य ने कहा-ई जगन्नाथ ! आपको नमस्कार है। हे देवदेव । आपको नमस्कार है। हे घासुदेव! आपको नमस्कार है । हे पहुरूपी ! आपको नमस्कार है।

हे एफगृह ! आपको नमस्कार है। हे वृपामपि ! आपको नमस्कार है।हे श्रीनिवास ! आपको नमस्कार है। हे भूतभावन ! आपको नमस्कार है। (२)

है विष्यासेन । आपो नमस्कार है। हे नारायण ! यापको नमस्कार है। भुवघज! आपको नमरगर है। दे सत्यध्यज! आपको नमसार है।

हे यजध्वज! आपो नमस्कार है। हे धर्मप्यज! आपको नमस्कार है। हे सालध्वज! आपको नमसार है। गरज! आपो नमस्कार है। (१)

हे वरेण्य ! हे विष्णु! हे वैकुण्ठ! हे पुरुषोत्तम ! आपको नमस्कार है । हे जयन्त ! विजय ! हे जय ! अनन्त ! हे पराजित! आपको नमस्कार है। हे पलावत हे महावर्त ! हे महादेव ! आपको नमसार है। अनाद्यापन्न ! हे मध्यान्न ! पाजप्रिय ! आपरों प्रणाम है।

हे पुरसय ! आपको नमस्कार । हे शनय ! आपको

शुभंजय नमस्तेऽस्तु नमस्तेऽस्तु धनंजय ॥७

सृष्टिगर्म नमस्तुभ्यं शुचिश्रयः पृथुश्रवः ।

नमो हिरण्यगर्भाय पद्यगर्भाय ते नमः ॥ ८

नमः कमलनेत्राय कालनेत्राय ते नमः ।

कालनाभ नमस्तुभ्यं महानाम नमो नमः ॥ ९

वृष्टिमूल महामूल मूलायास नमोऽस्तु ते ।

धर्मायास जलायास श्रीनिवास नमोऽस्तु ते ॥ १०

धर्माध्यक्ष प्रजाध्यक्ष लोकाध्यक्ष नमो नमः ।

सेनाध्यक्ष नमस्तुभ्यं कालाध्यक्ष नमोऽस्तु ते ॥ ११

गदाधर श्रुतिधर चक्रधारिन् श्रियो घर ।

वनमालाधर हरे नमस्ते धरणीधर ।। १२

आचिपेण महासेन नमस्तेऽस्तु पुरुष्टुत ।

पहुकल्प महाकल्प नमस्ते करपनामुस ॥ १३

सर्वात्मन् सर्वग विमो विरिश्चे श्वेत केशव ।

नील रक्त महानील अनिरुद्ध नमोऽस्तु ते ॥ १४

द्वादशात्मक कालात्मन् सामात्मन् परमात्मक।

व्योमकात्मक सुब्रह्मन् भूतात्मक नमोऽस्तु ते ॥ १५

हरिकेश महाकेश गुडाकेश नमोऽस्तु ते ।

मुकेश हपीकैश सर्वनाय नमोऽस्तु ते ॥ १६

सूक्ष्म स्थूल महास्थूल महासूक्ष्म शुभंकर ।

श्वेतपीताम्बरधर नीलवास नमोऽस्तु ते ॥१७

कुशेशय नमस्तेऽस्तु पदोशय जलेशय ।

गोविन्द प्रीतिकर्ता च हंस पीताम्मरनिय ॥१८

अधोक्षज नमस्तुभ्यं सीरध्वज जनार्दन ।

वामनाय नमस्तेऽस्तु नमस्ते मधुसुदन ॥ १९

सहस्रशीर्षाय नमो ब्रह्मशीर्षाय ते नमः।

नमः सहसनेत्राय सोमसूर्यानलेक्षण ॥ २०

नमथाथर्वशिरसे महाशीपाय ते नमः ।

नमस्ते धर्मनेत्राय महानेत्राय ते नमः ।। २१

नमः सहस्रपादाय महस्रभुजमन्यवे ।

प्रणाम है। हे शुभअय | आपको प्रणाम है। हे धनञ्जय ! आपको प्रणाम है। (७)

हे सष्टिगर्भ! हे शुचिनया हे पृथुश्रव । आपसे नमस्कार है। हिरण्यगर्भ को नमस्कार है। पद्मगर्भ को नमस्कार है।(८)

कमलनेत्र को प्रणाम है । आप कालनेत्र को प्रणाम है। हे पालनाम ! आपको प्रणाम है। हे महानाभ ! आपसे पारम्यार प्रणाम है।

हे पृष्टिमूल ! हे महामूल! हे मूरायास । आपसे प्रणाम है। हे धर्मावास! है जलायास ! हे श्रीनिवास । आपको प्रणाम है। (१०)

हे धर्माध्यत्त ! हे प्रजाभ्यक्ष ! हे लोकाध्यक्ष । आपसे बार-यार प्रणाम है। हे सेनाध्यक्ष । आपो प्रणाम है। हे कालाध्यक्ष ! आपले प्रणाम है। (११)

हे गदाधर ! है श्रुतिधर। हे घमघर । हे धीघर ! हे पनमालापर! हे धरणीधर हरि । ! धरणीधर हरि। आपनो प्रणाम है। (१२)

है आधिपेण! है महासेन । हे पुरष्टुन । आपको प्रणाम है। हे यहुकाप! यहुकम्प ! हे महाकल्प। कल्पनामुस ! आपको प्रणाम है। (१३)

हे सारमन् ! हे सर्यग! हे यिमुहे पिरिधि ! श्वेत! हे फेशय ! नील! हे रक! हे महानील! हे अनिरद्ध ! आपको नमस्कार है। (१४)

हे द्वादशात्मक । हे कालात्मन् ! हे सामात्मन् ! हे परमात्मक ! हे व्योमकात्मक । हे सुमझन् ! हे भूतात्मक ! आपको प्रणाम है।

हे हरिकेश। हे महाकेश। हे गुडाकेश | आपको प्रणाम है। हे मुकेश ! हे हपी कैश ! हे सर्वनाथ ! आपको प्रणाम है। (१६)

हे सूक्ष्म ' हे स्थूल । हे महारथूल । हे महामूक्ष्म ! हे शुभंर । हे श्वेतपीताम्बरधर । हे नीलयास ! आपको प्रणाम है। हे युशेशय । हे पद्मशय । हे जलेशय ! हे गोविन्द । प्रीतिकर्ता हे इस। हे पीताम्यरप्रिय! आपसे नमस्कार है। (१८)

हे अधोक्षज! हे सोरध्वज! हे जनार्दन। आपको प्रणाम है । हे यामन | आपको प्रणाम है। हे मधुमृदन ! आप प्रणाम है। (१६)

सहस्रशीर्प को नमसार है। तुम प्रधशीर्ष को प्रणाम है। सहस्र नेय और चन्द्रसूर्याननेमण को प्रणाम है। (२0)

अपर्यशिरा को नमस्कार है। महाशीर्य को प्रणाम है। धर्मने का प्रणाम है। महानेत्र को प्रणाम है। (२१)

सहस्रपाद को नमस्कार है सहयमुजाओं एवं सहस

नमो यज्ञवराहाय महारूपाय ते नमः ॥ २२

नमस्ते विश्वदेवाय विश्वात्मन् विश्वसंभव ।

विश्वरूप नमस्तेऽस्तु त्यत्तो विधममृदिदम् ॥ २३

न्यग्रोधस्त्वं महाशासस्त्वं मूलकुसुमार्चितः ।

स्कन्धपत्राकुरलतापट्याय नमोऽस्तु ते ॥ २४

मूलं ते ब्राह्मणा ब्रह्मन् स्कन्धस्ते क्षत्रियाः प्रमो।

वैश्याः शासा दलं शूद्रा वनस्पते नमोऽस्तु ते ॥ २५

ब्राह्मणाः साग्नयो वक्त्राः दोर्दण्डाः सायुधा नृपाः ।

पाश्चाद् विशश्वोरुयुगाजावाः शूद्राश्च पादतः ॥ २६

नेत्राद् भानुरभूव उभ्यं पनयां भूः श्रोत्रयोर्दिशः ।

नाम्या अमृदन्तरिक्षं शशाको मनसस्तव ।। २७

प्राणाद् वायुः समभवत् कामाद् ब्रह्मा पितामहः ।

फ्रोधात् त्रिनयनो रुद्रः शीर्णोः द्यौः समवर्तत ॥ २८

इन्द्रामी बदनात् तुम्यं पशयो मलसंमवाः ।

ओपध्यो रोमसंभूता चिराजस्त्यं नमोऽस्तु ते ।। २९

पुष्पहास नमस्तेऽस्तु महाहास नमोऽस्तु ते ।

*कारस्त्वं वपट्कारो वौपट त्वं च स्वधा सुधा ॥३०

स्वाहाकार नमस्तुभ्यं हन्तकार नमोऽस्तु ते ।

सर्वाकार निराकार वेदाकार नमोऽस्तु ते ॥ ३१

त्वं हि वेदमयो देवः सर्वदेवमयस्तया ।

सर्वतीर्थमयश्चैव सर्वयज्ञमयस्तया ॥ ३२

नमस्ते यज्ञपुरुप यज्ञमागमुजे नमः ।

नमः सहस्रधाराय शतधाराय ते नमः ॥ ३३

मूर्भुवःस्वःस्वरूपाय गोदायामृतदायिने ।

सुवर्णब्रह्मदात्रे च सर्वदात्रे च ते नमः ।। ३४

प्रदेशाय नमस्तुभ्यं प्रसाद ब्रह्मरूपधृक् ।

परब्रह्म नमस्तेऽस्तु शब्दब्रह्म नमोऽस्तु ते ॥ ३५

विद्यारत्वं वैद्यरूपस्त्व वेदनीयस्त्वमेव च ।

चुद्धिस्त्वमपि योध्यश्च योघस्त्वं च नमोऽस्तु ते ॥ ३६

होता होमय हव्यं च हूयमानय हव्यवाट् ।

यज्ञों याले को नमस्कार है। यनराह को नमस्कार है। आप महारूप को नमसार है। (२२)

विश्वदेय पो प्रणाम है। हे विश्वात्मन् ! हे विश्व सम्भय ! हे विश्यरप! आपो नमस्कार है। आप से यह विश्य उत्पन्न हुआ है। (२३)

आप न्यग्रोध, महाशारर तथा थप ही मूलयुसुमार्चित है। सन्ध, पत्र अंकुर, सता एवं पल्टय स्वरूप आपको नमस्कार है। (२४)

हे ग्रामन् ! प्राक्षण आपके मूल हैं। हे प्रभु । क्षत्रिय आपफे पन्ध, पैश्य शारग एवं शुद्र पन है । हे घनस्पति आपो नमाकार है। (२५)

अग्नि सहित मामण आपके मुस एवं शस्त्रसहित शनिय आपरी गुजाएं हैं। येरप आपके उरुद्धय के पार्य माग से सपा शुद्र आपके घरण से उत्पन्न हुए है। (२६)

आपक नेप से मूर्य उत्पन्न हुए। आपके पैरों से पृप्ती, पानों से दिशाणे, नाभि से अमरिश तथा मन से चन्द्रमा दरपन मुए हैं। (२७)

आपके भाग से पायु, पाम से पितामह प्रमा, मोध से गिनेवार एवं शिर से पुन्ो क आपिन दुना। (२०) वापस मुग से इन्द्र और अग्नि, म से पशु तथा रोम में औषधियों उम। आप विराज है। आप नमस्कार है। (२९)

हे पुष्पहास! आपसे प्रणाम है। हे महाहास ! थापको प्रणाम है। थाप ओंगर, पट्यार और योपट् है। आप सपा और सुधा हैं। है साहारार! आपको प्रणाम है। हे हन्तार ! आपशे प्रणाम है। हे सर! निरागार! हे पेदागार! आप प्रगाम है। (३१)

आप वेदमय देय तथा सर्वदेवमय है। आप सर्वतीर्थ- मय थीर सर्ययज्ञमय है। (३२)

है यमपुरुष | आपको प्रणाम है। याभागभोगी से प्रणाम है। सहसघार और शतधार यो प्रणाम है। (३३)

भूर्भुय रम स्यम्प, गोदाता, अमृतधाता, सुवर्णना-दाना मया सर्यदाता आपसे प्रगाम है। (३१)

आप मधेश पो नमस्कार है! मादि! देब्रह्मरूपधारी! हे परमग्रम ! आप प्रणाम है। समयम! आपने प्रणाम है। (३५)

बाप ही पिघा, आपदी येरूप तथा पापही रेनीय हैं। आप दी पुटि, पोष्य और पोपस्प हैं। भापये प्रणाम है।

भाप हवा, शेम, प, यमान नया दम्यपार,

पाता पोता च पूतय पाचनीयश्च ॐ नमः ।। ३७

हन्ता च हन्यमानश्च दियमाणत्यमेव च ।

हर्चा नेता च नीतिश्य पूज्योऽरयो विश्वधार्यसि ॥ ३८

सुनुवौ परघामामि कपालोलूसलोऽरणिः ।

यसपात्रारणेयस्त्वमेकधा बहुधा त्रिधा ॥३९

यज्ञस्त्वं यजमानस्त्वमीध्यस्त्वमसि याजकः।

ज्ञावा जेयस्तथा ज्ञानं ध्येयो ध्याताऽमि चेश्वर ॥ १०

ध्यानयोगश्च योगी च गतिमोक्षो धृतिः सुसम् ।

योगाङ्गानि त्यमीशानः सर्वगस्त्यं नमोऽस्तु ते ॥ ४१

ब्रह्मा होता तयोगावा साम यूपोऽध दक्षिणा ।

दीक्षा त्वं त्वं पुरोडाशस्त्वं पशुः पशुबाह्यमि ॥ ४२

गुरो धाता च परमः शियो नारायणस्तथा ।

महाजनो निरयनः सहस्रारेंन्दुरूपवान् ॥ ४३

द्वादशारोऽथ पण्णामिस्त्रिव्यूहो द्वियुगस्तथा ।

कालचको भवानीशो नमस्ते पुरुषोचमः ॥ ४४

पराक्रमो पिक्रमस्त्वं हयग्रीवो हरीश्वरः ।

नरेथरोग्य ब्रह्मेशः सूर्येशस्त्यं नमोऽस्तु ते ॥ ४५

अधवस्त्रो महामेघाः शंभुः शक्रः प्रभडनः ।

मित्रावरुणमूर्तिस्त्वममूर्तिरनघः परः ॥ ४६

प्राग्वंशकायो भूतादिमहाभूतोऽच्युतो द्विजः ।

स्वमूर्ध्वकर्ता ऊर्मश्च ऊन्नरेता नमोऽस्तु ते ॥ ४७

महापातकहा त्वं च उपपावकहा तथा ।

अनीशः सर्वपापेभ्यस्त्वामहं शरणं गतः ॥ ४८

इत्येतत् परमं स्तोत्रं मर्वपापप्रमोचनम् ।

महेश्वरेण कषितं वाराणस्यां पुरा सुने ॥ ४९

केशवम्याग्रतो गत्वा स्नात्मा ती सितोदके ।

उपशान्तस्तथा जावो रुद्रः पापयशाद ततः ॥ ५०

पाता, पोता, पूत तथा पारनीय ओंकार है। आपको नमस्कार है।

आप हन्ता, हन्यमान, ट्ठियमाग, हर्ता, नेता, नौति, पूग्य, प्रेष्ट तया विश्वधारी है। (३८)

आप खुक, सुन, परधाम, पालो, उसूखल, अरएि, यज्ञपान आरणेय, एक्या, प्रिया और बहुधा हैं। (३६)

आप यज्ञ हैं और आप यजमान है। आप ईड्य और याजक है। आप ज्ञाता, शंय, मान, ध्येय, ध्याता तथा (४0)

आप ध्यानयोग, योगी, गति, मोक्ष, भृति मुरा, योगाग, मन एय सरंग है। आपको नमस्कार है। (४१)

आप प्रमा, होता, उद्गाता, साम, यूप, दमिया या दोश है। आप पुरोडार है, एवं आप ही पशु क्या पायाही हैं। (१२)

आप गुप, धाता, परम, शिप, मापयन, महाजन, निरामय मया सदरा मूर्य-पन्द्र नुस्य रुपयान हैं। (१३)

आप द्वारा भरों, अनामियों, तीन म्यूहों एवं दो

युगों पाले कालचक तया ईश एवं पुरषोत्तम है। आपसे नमस्कार है। (४४)

आप परामम, विक्रम. हयपोर, हरीश्वर, नरेश्वर, ब्रह्मेश और सूर्येा है। आपको नमस्कार है। (४५)

आप असनान, महामेघा, दाम्भु, राम, प्रमजन, मित्रायरणमूर्ति, अति, अनघ और श्रेष्ठ हैं। (४६)

आप प्रागरसराय, भृतादि, महाभूत, अन्युन और द्विज हैं। आप उमेयत्ता, अर्थ और उभरेता है। आप नमस्कार है। (४७)

आप मदापातों के विनाशक तथा उपपातकों के नाशा है। आप सपापों से निर्मित हैं। मैं आप रण में आया हूँ।

हे मुनि । प्राचीन काल में महंधर ने इस समस्त पापों से मुक्ति देने याने प्रष्ट सत्र को पारागसी में पदा था। (४८)

सौर्य , स्पाप अउ में स्नानर पंप या न करने से स पाप पे प्रभार मे पुर पहुए

एवत् पवित्रं त्रिपुरनमापित

पठन् नरो विष्णुपरो महर्षे ।

विमुक्तपापो युपशान्तमूर्ति

संपूज्यते देवपरैः प्रसिद्धैः ॥ ५१

इति श्रीयामनपुराणे पष्टितमोऽध्यायः॥६॥