लिंग महा पुराण
126-त्रियम्बक मन्त्र विधि वर्णन
सूतजी बोले –
त्रियम्बक मन्त्र के द्वारा देव देव त्रियम्बक को लिंग में अथवा आयुर्वेद के विशारद विद्वानों के द्वारा यथा क्रम भूतल पर पूजना चाहिए। एक सौ आठ बार सफेद कमलों (पुण्डरीक) के द्वारा या लाल कमल के द्वारा तथा एक हजार नील कमल के द्वारा शंकर भगवान की पूजा करनी चाहिए। पूजा करने के बाद पूर्व में बताए हुए क्रम के अनुसार पायस, भात, मूंग तथा मधुर भक्ष्य पदार्थों को जो सुरभी के दूध, दही, घी आदि के द्वारा बने हुए हों उन्हें भगवान को निवेदन करना चाहिए। विशेष करके पूर्व में कहे हुए पुष्पों तथा चरु से होम कार्य करना चाहिए। एक नियुत यानी एक लाख भली भाँति जप करना चाहिए। एक हजार ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित भोजन करावे। उन्हें एक हजार गाय तथा सुवर्ण भी प्रदान करे। हे मुनीश्वरो! इस प्रकार का यह रहस्य मैंने तुम्हारे प्रति वर्णन किया, जो पूर्वकाल में देव देव त्रिशूली भगवान शंकर ने मेरु पर्वत की चोटी पर विराजमान अमित तेज वाले स्कन्द से कहा था। देव देव स्कन्द ने सब लोकों के हित के लिए ब्रह्मपुत्र सनत्कुमार जी से कहा। इसके बाद पराशर जी के पुत्र व्यास जी द्वारा परम्परा से यथाक्रम इस भूतल पर आया। व्यासजी ने अपने प्रिय पुत्र शुकदेव जी को परम धाम चले जाने पर बड़ा भारी शोक किया। तब उन्होंने त्रियम्बक भगवान को देखा और उनका दुःख दूर हुआ। उन्होंने स्कन्द की उत्पत्ति के विषय में सुना तथा विशेष करके त्रियम्बक के महात्म्य को सुना। हे ऋषियो! श्रीकृष्ण द्वैपायन व्यास को जो भगवान ने कहा तथा व्यास जी की कृपा से जो जो मुझे प्राप्त हुआ उस सबको मैं तुमसे कहूँगा। देव देव महादेव को विधिवत पूजकर त्रियम्बक मन्त्र का विधि पूर्वक जप करना चाहिए। ऐसा करने पर वह पुरुष सात जन्मों में भी किए गए सब पापों से मुक्त हो जाता है। संग्राम में उसकी विजय होती है तथा बड़े भारी सौभाग्य को प्राप्त करता है। इस मन्त्र का एक लाख होम करने पर राज की इच्छा करने वाला राज को प्राप्त कर लेता है। दस लाख जप करके होम करने वाला पुत्रार्थी मनुष्य पुत्र को प्राप्त करता है इसमें कोई सन्देह नहीं। धन की इच्छा वाला भी एक अयुत का जप करे, इस मन्त्र के प्रभाव से मनुष्य धन धान्य आदि को प्राप्त कर सभी मंगलों को प्राप्त करता है तथा पुत्र पौत्रादिकों के साथ इस लोक में क्रीड़ा करता हुआ अन्त में स्वर्ग पाता है। लोक और वेद में यह मन्त्र नाद के समान है। इसलिए इसके द्वारा नित्य ही भगवान त्रियम्बक की पूजा करनी चाहिए। अग्नि होम से यज्ञ का आठ गुना फल अधिक होता है। तीनों लोकों में, तीनों गुणों में, तीनों वेदों में तथा ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य तीनों जातियों में, अकार, उकार, मकार इन तीनों मात्राओं में, सूर्य, चन्द्र, अग्नि इन तीनों अग्नियों में, अम्बा, उमा और महादेव ये तीनों त्रियम्बक के नाम से स्थित हैं। वे सुन्दर पुष्प वाले वृक्ष में जैसी सुगन्ध होती है वैसी सुगन्ध वाले हैं और अत्यन्त शोभा वाले हैं। अति दूर से ही उन महात्मा शम्भु की सुगन्ध आती रहती है इसलिए भगवान शंकर सुगन्ध वाले हैं। वे महादेव अपनी गन्ध से तथा लीला से देवताओं को भी सुगन्धमय बनाते हैं। उनकी सुगन्ध इस लोक में, नभ के तल में वायु के द्वारा फैलती है। इसलिए उस सुगन्धि के कारण वह देव सुगन्ध और पुष्टि वर्धक कहलाते हैं। अपने वीर्य को पूर्व काल में शम्भु ने योनि में प्रतिष्ठित किया। उस वीर्य से ब्रह्मा की उत्पत्ति करने वाला हिरण्मय अण्ड उत्पन्न हुआ। उस वीर्य से ही सूर्य, चन्द्र, नक्षत्र, भू, भुर्वः, स्व, मह, जन, आप, सत्य आदि लोक क्रम से पुष्टि को प्राप्त हुए। पंचभूत, अहंकार, बुद्धि, प्रकृति आदि भी उससे पुष्टि को प्राप्त होते हैं। उससे बीजों की पुष्टि होती है इससे वह पुष्टि वर्धन कहलाते हैं। उन पुष्टि वर्धन देव का घी और खीर से मधु, यव गोधूम, उर्द विवफल, कुमुद, आक, शमीपत्र, गौरस, पलास आदि के द्वारा भक्ति पूर्वक यथा न्याय लिंग के लिए अग्नि में हवन करे। हे प्रभो! आप मुझे पाशों के कर्म बन्धन से तथा मृत्यु के बन्धन से मुक्त करके अमित तेज युक्त करिये। जिस प्रकार पका हुआ उर्वासक (फल विशेष) का फल वृक्ष से टूटने पर पुनः वृक्ष में नहीं लगता उसी प्रकार मुझे यत्न पूर्वक संसार से अलग करके पुनः उससे मत लगाओ। इस प्रकार भगवान की प्रार्थना करे। मन्त्र की इस प्रकार सब विधि जानकर और अर्थ जानकर शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। इससे योगी पाश का भेदन करके मृत्यु से छुटकारा पा लेता है। इसलिए सब छोड़कर त्रियम्बक उपासना करनी चाहिए और त्रियम्बक मन्त्र के द्वारा शिव की पूजा करनी चाहिए। सर्व अवस्थाओं में गया हुआ सब पापों से मुक्त हो जाता है। शिव ध्यान से मनुष्य जैसे रुद्र हैं वैसा ही हो जाता है इसमें कोई सन्देह नहीं है। प्राणियों की हत्या करके अन्याय का भोजन करके यदि एक बार भी शिव का स्मरण कर लेता है तो वह सब पापों से छूट जाता है, इसमें कोई सन्देह नहीं है।