11- श्वेत लोहित कल्प में सद्योजात की महिमा का वर्णन

ऋषि बोले-

हे सूतजी! पुराण पुरुषोत्तम महात्मा वामदेव महेश्वर जो सद्योजात जी हैं उन्हें ब्रह्मा जी ने किस प्रकार देखा ? उन अघोर और ईशान रूप सद्योजात भगवान के महात्म्य को कहने में आप समर्थ हैं सो हमें कृपा पूर्वक उसे कहने की कृपा करिये।

सूतजी बोले-

हे ब्राह्मणो! उन्तीसवें कल्प को श्वेत लोहित कल्प कहा है। उस कल्प में ध्यान करते हुए ब्रह्मा के सामने शिखा से युक्त सफेद और लाल रंग का एक कुमार उत्पन्न हुआ। उस शोभा सम्पन्न पुरुष को देख कर ब्रह्मा ने हृदय में ध्यान करके उस महात्मा को ब्रह्म स्वरूप माना और उस झट या शीघ्र पैदा होने वाले (सद्योजात) को परात्पर ब्रह्म जानकर वन्दना की तथा ब्रह्म रूप से ही उसका चिन्तन किया। उन सद्योजात के पात से ही महान यशस्वी श्वेत रंग के सुनन्द, नन्दन, विश्वनन्द और उपनन्द नाम के शिष्य भी प्रगट हुए, जिनसे वे सदा घिरे रहते हैं। उनके आगे श्वेत वर्ण की आत्मा वाले श्वेत नाम के महामुनि विराजमान रहते हैं। तब वे सभी मुनि लोग महेश्वर सद्योजात को प्राप्त करके उन शाश्वत का बहुत ही भक्ति भाव से गुणगान करने लगे और अन्त में उन्हीं को प्राप्त हुए। हे ब्राह्मणो! इस प्रकार जो कोई भी उन विश्वेश्वर की मन से तत्पर होकर प्राणायाम पूर्वक ध्यान करके शरण में आते हैं, वे सभी पापों से छूटकर विष्णु लोक को भी लांघकर रुद्र लोक को प्राप्त करते हैं ।