लिंग महा पुराण
125- मृत्युञ्जय विधि वर्णन
ऋषि बोले-
हे सूतजी! अब आप ब्राह्मण क्षत्री और वैश्यों के लिए मृत्युञ्जय विधि का वर्णन हमसे कीजिए। क्योंकि आप सर्वज्ञ हो और सब कुछ बताने में समर्थ हो।
सूतजी बोले-
हे श्रेष्ठ ब्राह्मणो! अब मैं मृत्युञ्जय विधि को बताऊँगा। विधि पूर्वक क्रम से एक नियुत अर्थात् लाख बार घी से हवन करना चाहिए। अथवा घी सहित तिल और कमल से प्रयत्न सहित हवन करे। अथवा दूर्वा, घृत, गौ का दूध और शहद मिलाकर हवन करना चाहिए। अथवा केवल घी और खीर का चारु बनाकर अग्नि में हवन करे इस प्रकार हवन करने वाला पुरुष काल मृत्यु को भी जीत लेता है, इसमें कोई संदेह नहीं करना चाहिए।