100- अष्टाक्षर मन्त्र की प्रशंसा

सूतजी बोले-

हे ब्राह्मणो! 'नमोनारायणाय अष्टाक्षर मन्त्र और 'ॐ नमः वासुदेवाय' द्वादशाक्षर मन्त्र परमात्मा के सबसे श्रेष्ठ हैं। 'ॐ नमो शिवाय' षडाक्षर मन्त्र सर्वार्थ साधक तथा परमात्मा का विशेष प्रिय है। शिवतराय, मयस्कराय और 'नमस्ते शंकराय' ये मन्त्र ब्रह्मा, विष्णु इत्यादि देवताओं के प्रिय हैं ये सभी इन्हीं मन्त्रों से पूजा करते हैं। शिव, शंकर, रुद्र, उमापति को ही कहते हैं। इन मन्त्रों का जप करने पर मनुष्य ब्रह्म हत्या से भी छूट जाता है। पहले त्रेतायुग में मेघवाहन कल्प में एक' धुन्धमूक' नाम का ब्राह्मण हुआ। वह उस कल्प में किसी मुनि के शाप से दुरात्मा उत्पन्न हो गया। धुन्धमूक ने कामासक्त चित्त से भार्या में गर्भ स्थापन किया। अमावस्या के दिन रुद्र देवता के मुहूर्त में उसकी विशल्या नाम की पत्नी से वह पुत्र उत्पन्न हुआ। रुद्र के समीप में जन्म लेने पर तथा शनि की दृष्टि होने पर माता पिता को कष्ट कारक हुआ। मित्रावरुण आदि ऋषियों ने उसे दुष्पुत्र बतलाया। वशिष्ठ ऋषि ने बताया कि यह नीच होने पर वृहस्पति के प्रभाव से पापों से मुक्त हो जाएगा। पिता ने जाति कर्म संस्कार आदि करने के बाद उसे अध्यापन कराया। उसका विवाह भी कर दिया। धुन्धमूक का वह पुत्र मदोन्मत्त होकर अन्य शूद्रा भार्या के साथ गमन करने लगा। उस शूद्रा के साथ मदिरा पान करके वह दुर्बुद्धि धर्म को भूल गया। किसी कारण से उस पापी ने उस शूद्रा को मार दिया। फिर उस शूद्रा के भाइयों ने धुन्धमूक को तथा उनकी पत्नी और पुत्रवधु को आकर मारा। राजा ने उसके साले आदि को नष्ट कर दिया। इस प्रकार दोनों ही कुल नष्ट हो गए। तब धुन्धमूक का पुत्र घूमता हुआ एक मुनि के आश्रम में जा पहुँचा जो कि रुद्र के जप में परायण थे। उस मुनि से उसने पाशुपत व्रत प्राप्त किया और पंचाक्षर तथा षडाक्षर मन्त्रों को प्राप्त किया। फिर पाँच पाँच लाख दोनों का जप किया। बारह दिव्य महीनों तक विधिवत् व्रत करके वह काल गति को प्राप्त हुआ। यमराज ने इसकी पूजा की। उसने अपने माता पिता, पत्नी और साले आदि सभी का उद्धार किया। इस सभी के साथ विमानों में चढ़कर वह इन्द्रादि देवताओं के द्वारा स्तुति किया गया रुद्र का प्रिय बना। इससे अष्टाक्षर मन्त्र से और द्वादशाक्षर मन्त्र से करोड़ों गुना फल मिलता है इसमें विचार नहीं करना चाहिए। पूर्व में कही शक्ति बीजों से युक्त जो इनका जप करता है वह परम गति को प्राप्त होता है। हे द्विजो! यह उत्तम कथा मैंने तुमसे कही जो इनको पढ़े या सुने अथवा सुनावेगा तथा उत्तम रुद्र मन्त्र का जाप करेगा, वह रुद्र लोक को प्राप्त करेगा।