124- वशीकरण तथा आकर्षण आदि का वर्णन

ऋषि बोले –

हे रोमहर्षण जी! वज्रेश्वरी विद्या जो इन्द्र का उपकार करने वाली है वह हमने सुनी तथा हमसे राजाओं का महान उपकार होता है, यह भी सुना। इस विद्या का विनियोग और बताइये।

सूतजी बोले-

वशीकरण, आकर्षण, विद्वेषण, उच्चाटन, स्तम्भन, मोहन, ताड़न, उच्चाटन तथा छेदन, मारण, प्रतिबन्ध, सेना का स्तम्भन आदि सब कार्य सावित्री मन्त्र द्वारा ही सिद्ध होते हैं।

आयातु वरदादेवी भूम्यां पूर्वतमूर्द्धनि।

ब्राह्मणेभ्योह्यनुज्ञाता गच्छ देवि! यथासुखम् ॥

इस मन्त्र द्वारा आवाह्न आदि करे फिर वशीकरण आदि सब क्रिया करे। देवी का आवाह्न करके पूजन तथा अग्नि में हवन करे। इस विद्या से सब कार्य सिद्ध करे। वशीकरण इच्छा वाला तीस हजार हवन जाति पुरुषों के द्वारा करे। आकर्षण करने वाला घी और कन्नेर से हवन करे। विद्वेश वाला लांगलक से तथा तेल के द्वारा उच्चारु वाला होम करे। स्तम्भन की इच्छा वाला मधु (शहद) से और मोहन वाला तिल से एवं ताड़न करने वाला रुधिर से अग्नि में हवन करे। खर, गज, ऊँट के स्तम्भन के लिए सरसों का प्रयोग करना चाहिए। बन्धन नागफली के द्वारा करे। घी से सब प्रकार शुद्धि, दूध में विशेष प्रकार की शुद्धि तथा तिलों से रोग का नाश होता है। कमल से धन की प्राप्ति, महुआ के पुष्प से कान्ति प्राप्त होती है। इस प्रकार सावित्री का हवन तथा संक्षेप से विनियोग मैंने तुम से कहा। इस विद्या को केवल विधान पूर्वक जप करे तो भी सब प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति हो। इसमें कोई विचार नहीं करने चाहिए।