55- चन्द्रमा के रथ का वर्णन

सूतजी बोले-

नक्षत्रों पर विचरने वाले चन्द्रमा का रथ तीन चक्रवाला, सौ अरा और १० सफेद घोड़ों से युक्त है। सोम (चन्द्रमा) देवताओं और पितृजनों के साथ शुक्ल पक्ष में सूर्य से ऊपर गमन करते हैं। पूर्णमासी को वह पूरे मण्डल सहित दिखते हैं। कृष्ण पक्ष की द्वितीया से चौदस तक देवता उनके अम्बुमय सुधा का पान करते हैं। इसके बाद वह सूर्य के तेज से फिर वृद्धि को प्राप्त होता है और पूर्णिमा को पूर्ण होता है। इस तरह कृष्ण पक्ष में कलाओं के क्षय और शुक्ल पक्ष में वृद्धि होती रहती है। पितर अमावस्या को चन्द्रमा में ही रहते हैं और अमृत पान कर एक महीने को तृप्त होकर चले जाते हैं। इस प्रकार वृद्धि और भय को प्राप्त हुए चन्द्रमा को वृद्धि शुक्ल पक्ष में सूर्य द्वारा ही मिलती है।