वामन महा पुराण
मह्रेश्वरोक्त पाप प्रशमन-स्रोत
वहाँ पुरपोत्तम जगन्नाथ की आराधना कर समस्त पापों से मुक्त होकर उसने विष्णुलोक शाप्त किया। (११९)
हे ब्रह्मन् ! मैंने तुमसे विप्रमुखस्य सरस्वती द्वारा सम्यक्त्या कथित विष्णु का यह सारस्वत स्तोत्र कहा। (१२0)
यासुदेव के इस श्रेष्ठ स्तोत्र को पढ़ने वाला मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जायेगा। (१२१)
पुलस्त्य ने कहा-ई जगन्नाथ ! आपको नमस्कार है। हे देवदेव । आपको नमस्कार है। हे घासुदेव! आपको नमस्कार है । हे पहुरूपी ! आपको नमस्कार है।
हे एफगृह ! आपको नमस्कार है। हे वृपामपि ! आपको नमस्कार है।हे श्रीनिवास ! आपको नमस्कार है। हे भूतभावन ! आपको नमस्कार है। (२)
है विष्यासेन । आपो नमस्कार है। हे नारायण ! यापको नमस्कार है। भुवघज! आपको नमरगर है। दे सत्यध्यज! आपको नमसार है।
हे यजध्वज! आपो नमस्कार है। हे धर्मप्यज! आपको नमस्कार है। हे सालध्वज! आपको नमसार है। गरज! आपो नमस्कार है। (१)
हे वरेण्य ! हे विष्णु! हे वैकुण्ठ! हे पुरुषोत्तम ! आपको नमस्कार है । हे जयन्त ! विजय ! हे जय ! अनन्त ! हे पराजित! आपको नमस्कार है। हे पलावत हे महावर्त ! हे महादेव ! आपको नमसार है। अनाद्यापन्न ! हे मध्यान्न ! पाजप्रिय ! आपरों प्रणाम है।
हे पुरसय ! आपको नमस्कार । हे शनय ! आपको
प्रणाम है। हे शुभअय | आपको प्रणाम है। हे धनञ्जय ! आपको प्रणाम है। (७)
हे सष्टिगर्भ! हे शुचिनया हे पृथुश्रव । आपसे नमस्कार है। हिरण्यगर्भ को नमस्कार है। पद्मगर्भ को नमस्कार है।(८)
कमलनेत्र को प्रणाम है । आप कालनेत्र को प्रणाम है। हे पालनाम ! आपको प्रणाम है। हे महानाभ ! आपसे पारम्यार प्रणाम है।
हे पृष्टिमूल ! हे महामूल! हे मूरायास । आपसे प्रणाम है। हे धर्मावास! है जलायास ! हे श्रीनिवास । आपको प्रणाम है। (१०)
हे धर्माध्यत्त ! हे प्रजाभ्यक्ष ! हे लोकाध्यक्ष । आपसे बार-यार प्रणाम है। हे सेनाध्यक्ष । आपो प्रणाम है। हे कालाध्यक्ष ! आपले प्रणाम है। (११)
हे गदाधर ! है श्रुतिधर। हे घमघर । हे धीघर ! हे पनमालापर! हे धरणीधर हरि । ! धरणीधर हरि। आपनो प्रणाम है। (१२)
है आधिपेण! है महासेन । हे पुरष्टुन । आपको प्रणाम है। हे यहुकाप! यहुकम्प ! हे महाकल्प। कल्पनामुस ! आपको प्रणाम है। (१३)
हे सारमन् ! हे सर्यग! हे यिमुहे पिरिधि ! श्वेत! हे फेशय ! नील! हे रक! हे महानील! हे अनिरद्ध ! आपको नमस्कार है। (१४)
हे द्वादशात्मक । हे कालात्मन् ! हे सामात्मन् ! हे परमात्मक ! हे व्योमकात्मक । हे सुमझन् ! हे भूतात्मक ! आपको प्रणाम है।
हे हरिकेश। हे महाकेश। हे गुडाकेश | आपको प्रणाम है। हे मुकेश ! हे हपी कैश ! हे सर्वनाथ ! आपको प्रणाम है। (१६)
हे सूक्ष्म ' हे स्थूल । हे महारथूल । हे महामूक्ष्म ! हे शुभंर । हे श्वेतपीताम्बरधर । हे नीलयास ! आपको प्रणाम है। हे युशेशय । हे पद्मशय । हे जलेशय ! हे गोविन्द । प्रीतिकर्ता हे इस। हे पीताम्यरप्रिय! आपसे नमस्कार है। (१८)
हे अधोक्षज! हे सोरध्वज! हे जनार्दन। आपको प्रणाम है । हे यामन | आपको प्रणाम है। हे मधुमृदन ! आप प्रणाम है। (१६)
सहस्रशीर्प को नमसार है। तुम प्रधशीर्ष को प्रणाम है। सहस्र नेय और चन्द्रसूर्याननेमण को प्रणाम है। (२0)
अपर्यशिरा को नमस्कार है। महाशीर्य को प्रणाम है। धर्मने का प्रणाम है। महानेत्र को प्रणाम है। (२१)
सहस्रपाद को नमस्कार है सहयमुजाओं एवं सहस
यज्ञों याले को नमस्कार है। यनराह को नमस्कार है। आप महारूप को नमसार है। (२२)
विश्वदेय पो प्रणाम है। हे विश्वात्मन् ! हे विश्व सम्भय ! हे विश्यरप! आपो नमस्कार है। आप से यह विश्य उत्पन्न हुआ है। (२३)
आप न्यग्रोध, महाशारर तथा थप ही मूलयुसुमार्चित है। सन्ध, पत्र अंकुर, सता एवं पल्टय स्वरूप आपको नमस्कार है। (२४)
हे ग्रामन् ! प्राक्षण आपके मूल हैं। हे प्रभु । क्षत्रिय आपफे पन्ध, पैश्य शारग एवं शुद्र पन है । हे घनस्पति आपो नमाकार है। (२५)
अग्नि सहित मामण आपके मुस एवं शस्त्रसहित शनिय आपरी गुजाएं हैं। येरप आपके उरुद्धय के पार्य माग से सपा शुद्र आपके घरण से उत्पन्न हुए है। (२६)
आपक नेप से मूर्य उत्पन्न हुए। आपके पैरों से पृप्ती, पानों से दिशाणे, नाभि से अमरिश तथा मन से चन्द्रमा दरपन मुए हैं। (२७)
आपके भाग से पायु, पाम से पितामह प्रमा, मोध से गिनेवार एवं शिर से पुन्ो क आपिन दुना। (२०) वापस मुग से इन्द्र और अग्नि, म से पशु तथा रोम में औषधियों उम। आप विराज है। आप नमस्कार है। (२९)
हे पुष्पहास! आपसे प्रणाम है। हे महाहास ! थापको प्रणाम है। थाप ओंगर, पट्यार और योपट् है। आप सपा और सुधा हैं। है साहारार! आपको प्रणाम है। हे हन्तार ! आपशे प्रणाम है। हे सर! निरागार! हे पेदागार! आप प्रगाम है। (३१)
आप वेदमय देय तथा सर्वदेवमय है। आप सर्वतीर्थ- मय थीर सर्ययज्ञमय है। (३२)
है यमपुरुष | आपको प्रणाम है। याभागभोगी से प्रणाम है। सहसघार और शतधार यो प्रणाम है। (३३)
भूर्भुय रम स्यम्प, गोदाता, अमृतधाता, सुवर्णना-दाना मया सर्यदाता आपसे प्रगाम है। (३१)
आप मधेश पो नमस्कार है! मादि! देब्रह्मरूपधारी! हे परमग्रम ! आप प्रणाम है। समयम! आपने प्रणाम है। (३५)
बाप ही पिघा, आपदी येरूप तथा पापही रेनीय हैं। आप दी पुटि, पोष्य और पोपस्प हैं। भापये प्रणाम है।
भाप हवा, शेम, प, यमान नया दम्यपार,
पाता, पोता, पूत तथा पारनीय ओंकार है। आपको नमस्कार है।
आप हन्ता, हन्यमान, ट्ठियमाग, हर्ता, नेता, नौति, पूग्य, प्रेष्ट तया विश्वधारी है। (३८)
आप खुक, सुन, परधाम, पालो, उसूखल, अरएि, यज्ञपान आरणेय, एक्या, प्रिया और बहुधा हैं। (३६)
आप यज्ञ हैं और आप यजमान है। आप ईड्य और याजक है। आप ज्ञाता, शंय, मान, ध्येय, ध्याता तथा (४0)
आप ध्यानयोग, योगी, गति, मोक्ष, भृति मुरा, योगाग, मन एय सरंग है। आपको नमस्कार है। (४१)
आप प्रमा, होता, उद्गाता, साम, यूप, दमिया या दोश है। आप पुरोडार है, एवं आप ही पशु क्या पायाही हैं। (१२)
आप गुप, धाता, परम, शिप, मापयन, महाजन, निरामय मया सदरा मूर्य-पन्द्र नुस्य रुपयान हैं। (१३)
आप द्वारा भरों, अनामियों, तीन म्यूहों एवं दो
युगों पाले कालचक तया ईश एवं पुरषोत्तम है। आपसे नमस्कार है। (४४)
आप परामम, विक्रम. हयपोर, हरीश्वर, नरेश्वर, ब्रह्मेश और सूर्येा है। आपको नमस्कार है। (४५)
आप असनान, महामेघा, दाम्भु, राम, प्रमजन, मित्रायरणमूर्ति, अति, अनघ और श्रेष्ठ हैं। (४६)
आप प्रागरसराय, भृतादि, महाभूत, अन्युन और द्विज हैं। आप उमेयत्ता, अर्थ और उभरेता है। आप नमस्कार है। (४७)
आप मदापातों के विनाशक तथा उपपातकों के नाशा है। आप सपापों से निर्मित हैं। मैं आप रण में आया हूँ।
हे मुनि । प्राचीन काल में महंधर ने इस समस्त पापों से मुक्ति देने याने प्रष्ट सत्र को पारागसी में पदा था। (४८)
सौर्य , स्पाप अउ में स्नानर पंप या न करने से स पाप पे प्रभार मे पुर पहुए