17-प्रतिपदा तिथि एवं अग्निकी महिमाका वर्णन

महातपा बोले-राजन् ! प्रसङ्गवश भगवान् विष्णुकी विभूतिका वर्णन कर दिया। अब तिथियोंका माहात्म्य कहता हूँ, सुनो। जब ब्रह्माके क्रोधसे अग्निका प्राकट्य हुआ तो उन्होंने ब्रह्माजीसे कहा-'विभो! मेरे लिये तिथि निश्चय करनेकी कृपा कीजिये, जिसमें पूजित होकर सम्पूर्ण जगत्के समक्ष मैं प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकूँ।'

ब्रह्माजी बोले-परम श्रेष्ठ अग्निदेव! देवताओं, यक्षों और गन्धर्वोके भी पूर्व तुम सर्वप्रथम प्रतिपदाको उत्पन्न हुए हो और तुम्हारे पश्चात् इन सबका यहाँ प्राकट्य हुआ है। अतः प्रतिपद् नामकी यह तिथि तुम्हारे लिये विहित होगी। इस तिथिमें प्रजापतिकी मूर्तिभूत हविष्यसे जो तुममें हवन करेंगे, उन्हें सम्पूर्ण देवताओं और पितरोंकी प्रसन्नता प्राप्त होगी। चार प्रकारके प्राणीअण्डज, पिण्डज, स्वेदज, उद्भिज्ज तथा देवता, दानव, मानव, पशु एवं गन्धर्व-ये सभी तुममें हवन करनेपर तृप्त हो सकते हैं। तुम्हारे प्रति श्रद्धा रखनेवाला जो पुरुष प्रतिपदा तिथिके दिन उपवास करेगा अथवा केवल दूधके आहारपर ही रहेगा, उसके महान् फलका वर्णन सुनो'छब्बीस चतुर्युगीतक वह स्वर्गलोकमें सम्मानपूर्वक पूजित होगा। इस जन्ममें वह पुरुष प्रतापी, धनवान् एवं सुन्दर रूपवाला राजा होता है और मरनेपर स्वर्गमें उसे परम प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।' इस प्रकार ब्रह्माजीके बतानेपर अग्निदेव मौन हो गये और उनकी आज्ञाके अनुसार दिये हुए लोक (अग्निलोक)-को पधारे। जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल उठकर अग्निके जन्मसे सम्बन्धित इस प्रसङ्गको सुनेगा, वह सम्पूर्ण पापोंसे छूट जायगाइसमें कोई संशय नहीं।