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वराह महा पुराण

Contents
  • 1 - भगवान् वराहके प्रति पृथ्वीका प्रश्न और भगवान्के उदरमें विश्वब्रह्माण्डका दर्शनकर भयभीत हुई पृथ्वीद्वारा उनकी स्तुति
  • 2- विभिन्न सर्गोंका वर्णन तथा देवर्षि नारदको वेदमाता सावित्रीका अद्भुत कन्याके रूपमे दर्शन होनेसे आश्चर्यकी प्राप्ति
  • 3- देवर्षि नारदद्वारा अपने पूर्वजन्मवर्णनके प्रसङ्गमें ब्रह्मपारस्तोत्रका कथन
  • 4-महामुनि कपिल और जैगीषव्यद्वारा राजा अश्वशिराको भगवान् नारायणकी सर्वव्यापकताका प्रत्यक्ष दर्शन कराना
  • 5-रैभ्य मुनि और राजा वसुका देवगुरु बृहस्पतिसे संवाद तथा राजा अश्वशिराद्वारा यज्ञमूर्ति भगवान् नारायणका स्तवन एवं उनके श्रीविग्रहमें लीन होना
  • 6-पुण्डरीकाक्षपार-स्तोत्र, राजा वसुके जन्मान्तरका प्रसङ्ग तथा उनका भगवान् श्रीहरिमें लय होना
  • 7-रैभ्य-सनत्कुमार-संवाद, गयामें पिण्डदानकी महिमा एवं रैभ्य मुनिका ऊर्ध्वलोकमें गमन
  • 8-भगवान्का मत्स्यावतार तथा उनकी देवताओंद्वारा स्तुति
  • 9-राजा दुर्जयके चरित्र-वर्णनके प्रसङ्गमें मुनिवर गौरमुखके आश्रमकी शोभाका वर्णन
  • 10-राजा दुर्जयका चरित्र तथा  नैमिषारण्यकी प्रसिद्धिका प्रसङ्ग
  • 11-राजा सुप्रतीककृत भगवान्की स्तुति तथा श्रीविग्रहमें लीन होना
  • 12-पितरोंका परिचय, श्राद्धके समय का निरूपण तथा पितृगीत
  • 13-श्राद्ध-कल्प
  • 14-गौरमुखके द्वारा दस अवतारोंका स्तवन तथा उनका ब्रह्ममें लीन होना
  • 15-16-महातपाका उपाख्यान
  • 17-प्रतिपदा तिथि एवं अग्निकी महिमाका वर्णन
  • 18-अश्विनीकुमारोंकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग और उनके द्वारा भगवत्स्तुति
  • 19-गौरीकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग, द्वितीया तिथि एवं रुद्रद्वारा जलमें तपस्या, दक्षके यज्ञमें रुद्र और विष्णुका संघर्ष
  • 20-तृतीया तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें हिमालयकी पुत्रीरूपमें गौरीकी उत्पत्तिका वर्णन और भगवान् शंकरके साथ उनके विवाहकी कथा ।
  • 21-गणेशजी की उत्पत्तिका प्रसङ्ग और चतुर्थी तिथिका
  • 22-सर्पोकी उत्पत्तिका प्रसङ्ग और पञ्चमी तिथिकी महिमा
  • 23-षष्ठी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें स्वामी कार्तिकेयके जन्मकी कथा
  • 24-सप्तमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें आदित्योंकी उत्पत्तिकी कथा
  • 25-अष्टमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें मातृकाओंकी उत्पत्तिकी कथा
  • 26-नवमी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें दुर्गादेवीकी उत्पत्ति-कथा
  • 27-दशमी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें दिशाओंकी उत्पत्तिकी कथा
  • 28-एकादशी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें कुबेरकी उत्पत्ति-कथा
  • 29-द्वादशी तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें उसके अधिष्ठाता श्रीभगवान् विष्णुकी उत्पत्ति-कथा
  • 30-त्रयोदशी तिथि एवं धर्मकी उत्पत्तिका वर्णन
  • 31-चतुर्दशी तिथिके माहात्म्यके प्रसङ्गमें रुद्रकी उत्पत्तिका वर्णन
  • 32-अमावास्या तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें पितरोंकी उत्पत्तिका कथन
  • 33-पूर्णिमा तिथिकी महिमाके प्रसङ्गमें उसके स्वामी चन्द्रमाकी उत्पत्तिका वर्णन
  • 34-प्राचीन इतिहासका वर्णन
  • 35-आरुणि और व्याधका प्रसङ्ग, नारायण-मन्त्र-श्रवणसे बाघका शापसे उद्धार
  • 36-सत्यतपाका प्राचीन प्रसङ्ग
  • 37-मत्स्यद्वादशीव्रतका विधान तथा फल-कथन
  • 38-कूर्म-द्वादशीव्रत
  • 39-वराह-द्वादशीव्रत
  • 40-नृसिंह-द्वादशीव्रत
  • 41-वामन-द्वादशीव्रत
  • 42-जामदग्न्य-द्वादशीव्रत
  • 43-46-श्रीराम एवं श्रीकृष्ण-द्वादशीव्रत
  • 47-बुद्ध-द्वादशीव्रत
  • 48-कल्कि-द्वादशीव्रत
  • 49-पद्मनाभ-द्वादशीव्रत
  • 50-धरणीव्रत
  • 51-अगस्त्य-गीता
  • 52-53-अगस्त्य-गीतामें पशुपालका चरित्र
  • 54-उत्तम पति प्राप्त करनेका साधनस्वरूप व्रत
  • 55-शुभ-व्रत
  • 56-धन्यव्रत
  • 57-कान्तिव्रत
  • 58-सौभाग्य-व्रत
  • 59-अविनव्रत
  • 60-शान्ति-व्रत
  • 61-काम-व्रत
  • 62-आरोग्य-व्रत
  • 63-पुत्रप्राप्ति-व्रत
  • 64-65-शौर्य एवं सार्वभौम-व्रत
  • 66-68-राजा भद्राश्वका प्रश्न और नारदजीके द्वारा विष्णुके आश्चर्यमय स्वरूपका वर्णन
  • 69-भगवान् नारायणसम्बन्धी आश्चर्यका वर्णन
  • 70-सत्ययुग, त्रेता और द्वापर आदिके गुणधर्म
  • 71-कलियुगका वर्णन
  • 72-प्रकृति और पुरुषका निर्णय
  • 73-वैराज-वृत्तान्त
  • 74-भुवन-कोशका वर्णन
  • 75-जम्बूद्वीपसे सम्बन्धित सुमेरुपर्वतका वर्णन
  • 76-आठ दिक्पालोंकी पुरियोंका वर्णन
  • 77-मेरुपर्वतका वर्णन
  • 78-मन्दर आदि पर्वतोंका वर्णन
  • 79-मेरुपर्वतके जलाशय
  • 80-मेरुपर्वतकी नदियाँ
  • 81-देव-पर्वतोपरके देव-स्थानोंका परिचय
  • 82-नदियोंका अवतरण
  • 83-84-नैषध एवं रम्यकवर्षोंके कुलपर्वत, जनपद और नदियाँ
  • 85-भारतवर्षके नौ खण्डोंका वर्णन
  • 86-87-शाक एवं कुश-द्वीपोंका वर्णन
  • 88-89-क्रौञ्च और शाल्मलिद्वीपका वर्णन
  • 90-त्रिशक्ति-माहात्म्य*                                        (*"वराहपुराण' का यह आख्यान बहुत प्रसिद्ध है। भास्कररायने 'ललितासहस्रनाम'-'सौभाग्य भास्करभाष्य के पृ० ११७, १३३, १३६, १४५-५०, १५४ (३ बार), १६१ आदिपर तथा सेतुबन्ध में भी पग-पगपर इस ('त्रिशक्तिमाहात्म्य')के श्लोकोंको उद्धृत किया है।)
  • 91-92-त्रिशक्ति-माहात्म्यमें 'सृष्टि', 'सरस्वती' तथा 'वैष्णवी' देवियोंका वर्णन
  • 93-94-महिषासुरकी मन्त्रणा और देवासुर-संग्राम
  • 95-महिषासुरका वध
  • 96-त्रिशक्तिमाहात्म्यमें रौद्रीव्रत
  • 97-रुद्रके माहात्म्यका वर्णन
  • 98-सत्यतपाका शेष वृत्तान्त
  • 99-तिलधेनुका माहात्म्य
  • 100-जलधेनु एवं रसधेनु-दानकी विधि
  • 101-गुड़धेनु-दानकी विधि
  • 102-शर्करा तथा मधु-धेनुके दानकी विधि
  • 103- 'क्षीरधेनु' तथा 'दधिधेनु'-दानकी विधि
  • 104- 'नवनीतधेनु' तथा 'लवणधेनु'की दानविधि
  • 105- 'कार्पास' एवं 'धान्य-धेनु'की दानविधि
  • 106- कपिलादानकी विधि एवं माहात्म्य
  • 107- कपिला-माहात्म्य, 'उभयतोमुखी' गोदान, हेम-कुम्भदान और पुराणकी प्रशंसा
  • 108- पृथ्वीद्वारा भगवान्की विभूतियोंका वर्णन
  • 109- श्रीवराहावतारका वर्णन
  • 110- विविध धर्मोंकी उत्पत्ति
  • 111 - सुख और दुःखका निरूपण
  • 112 - भगवान् न्की सेवामें परिहार्य बत्तीस अपराध
  • 113 - पूजाके उपचार
  • 114 - श्रीहरिके भोज्य पदार्थ एवं भजन-ध्यानके नियम
  • 115 - मुक्तिके साधन
  • 117 - पुष्पादिका माहात्म्य
  • 118 - वसन्त आदि ऋतुओंमें भगवान्की पूजा करनेकी विधि और माहात्म्य
  • 119 - माया-चक्रका वर्णन तथा मायापुरी (हरिद्वार)-का माहात्म्य
  • 120 - कुब्जाम्रकतीर्थ (हृषीकेश)-का माहात्म्य, रैभ्यमुनिपर भगवत्कृपा
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