Read Agni Maha Purāṇa in Hindi Online

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महापुराणों में अत्यंत तेजस्वी, सर्वविद्या सम्पन्न श्री अग्नि महापुराण भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की परम पावन निधि है। भगवान श्रीमन्नारायण की दिव्य अनुकंपा से साक्षात अग्निदेव ने ब्रह्मर्षि वशिष्ठ को इस परम ज्ञान का उपदेश प्रदान किया।

इस दिव्य महापुराण में जगत् की सृष्टि, भगवान के पावन दशावतारों की लीलाएँ, रामायण एवं महाभारत के पावन आख्यान, धर्मशास्त्र, पूजा-पद्धतियाँ, मंत्र-तंत्र विद्या, मंदिर निर्माण तथा मूर्ति प्रतिष्ठा विधान, व्रत-उत्सवों का वैभव, राजनीति (राजधर्म), आयुर्वेद, धनुर्वेद, ज्योतिष, व्याकरण, काव्य शास्त्र तथा परम मुक्तिदायिनी आत्मविद्या का विस्तृत एवं भक्तिमय वर्णन है।

अग्नि पुराण का श्रवण और पठन समस्त पापों का शमन करने वाला, जीवन में शुभता लाने वाला तथा भगवद-भक्ति प्रदान करने वाला है। नीचे श्री अग्नि पुराण के अध्यायों की विस्तृत एवं भक्तिरसमय विषय-सूची प्रस्तुत की जा रही है।

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केवल अनुवाद

अध्यायों की विस्तृत विषय सूची

अध्याय 1 से 100: अवताराख्यान, उपासना एवं मंदिर प्रतिष्ठा विधान

  • अध्याय 1 — अवतार वर्णन — भगवान विष्णु के दिव्यावतार: अग्निदेव द्वारा वशिष्ठ मुनि को ज्ञान का उपदेश, मत्स्य से लेकर कल्कि तक दश अवतारों की पावन लीलाओं और धर्म-संस्थापन के उद्देश्य का वर्णन।
  • अध्याय 2 — मत्स्य अवतार कथन — मत्स्यावतार वैभव: हयग्रीव/शंखासुर से वेदों की रक्षा, प्रलयकाल में मनु, सप्तर्षियों एवं सर्व-बीजों को नौका द्वारा सुरक्षित हिमालय के शिखर तक पहुँचाने की कथा।
  • अध्याय 3 — कूर्म अवतार कथन — कूर्मावतार वैभव: समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को डूबने से बचाने हेतु कूर्म रूप धारण करना तथा भगवान सुदर्शन चक्र द्वारा राहु का मस्तक छेदन।
  • अध्याय 4 — वराह अवतार कथन — वराहावतार वैभव: हिरण्याक्ष द्वारा पृथ्वी को रसातल में ले जाने पर भगवान द्वारा वराह रूप धारण कर दैत्य का वध करना और पृथ्वी का उद्धार।
  • अध्याय 5 — नृसिंह अवतार कथन — नृसिंहावतार वैभव: परम भागवत प्रह्लाद की रक्षा तथा हिरण्यकशिपु के संहार हेतु खंभा फाड़कर नृसिंह रूप में प्रकट होना।
  • अध्याय 6 — वामन अवतार कथन — वामनावतार वैभव: राजा बलि के यज्ञ में वामन रूप में पधारकर तीन पग भूमि माँगना और त्रिविक्रम रूप से तीनों लोकों को नापकर बलि पर अनुग्रह करना।
  • अध्याय 7 — परशुराम अवतार कथन — परशुरामावतार वैभव: कार्तवीर्यार्जुन द्वारा जमदग्नि मुनि के वध के बदले इक्कीस बार पृथ्वी को अधर्मी क्षत्रियों से रहित करना।
  • अध्याय 8 — राम अवतार कथन (भाग 1) — बाल एवं अयोध्या कांड सार: श्रीराम जन्मोत्सव, विश्वामित्र यज्ञ रक्षा, धनुर्भंग, सीता विवाह और श्रीराम का वनगमन।
  • अध्याय 9 — राम अवतार कथन (भाग 2) — अरण्य एवं किष्किंधा कांड सार: दंडकारण्य वास, खर-दूषण वध, सीता हरण, जटायु मोक्ष, सुग्रीव मैत्री और वाली वध।
  • अध्याय 10 — राम अवतार कथन (भाग 3) — सुंदर एवं युद्ध कांड सार: हनुमान जी द्वारा लंका दहन, सेतु निर्माण, रावण वध, सीता अग्निपरीक्षा और अयोध्या में रामराज्य।
  • अध्याय 11 — कृष्ण अवतार कथन (भाग 1) — बाल लीलाएँ: मथुरा के कारागार में श्रीकृष्ण जन्म, गोकुल गमन, पूतना वध एवं बाल लीलाएँ।
  • अध्याय 12 — कृष्ण अवतार कथन (भाग 2) — किशोरावस्था लीलाएँ: कालिय मर्दन, गोवर्धन धारण, रासलीला एवं कंस का संहार।
  • अध्याय 13 — कृष्ण अवतार कथन (भाग 3) — द्वारका निर्माण एवं महाभारत युद्ध: द्वारका नगरी की स्थापना, अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश, महाभारत युद्ध एवं यदुवंश संहार।
  • अध्याय 14 — बुद्ध एवं कल्कि अवतार कथन — भावी अवतार: असुरों के सम्मोहन हेतु बुद्धावतार तथा कलयुग के अंत में धर्म संस्थापन हेतु कल्कि अवतार का वर्णन।
  • अध्याय 15 — मन्वंतर वर्णन: चौदह मन्वंतरों का कालचक्र, मन्वंतर के मरुत, सप्तर्षि एवं इंद्रगण।
  • अध्याय 16 — सूर्य वंश वर्णन: ब्रह्मा, सूर्य, मनु, इक्ष्वाकु, सगर, भगीरथ से लेकर श्रीराम तक सूर्यवंश का वर्णन।
  • अध्याय 17 — चंद्र वंश वर्णन: चंद्र, पुरूरवा, ययाति, यदु, कुरु और पांडवों का चंद्रवंश आख्यान।
  • अध्याय 18 — शिव वर्णन एवं शिव गीता: भगवान शिव की महिमा, पंचकृत्य एवं शिवगीता का अद्वैत उपदेश।
  • अध्याय 19 — देवी माहात्म्य: श्री दुर्गा देवी की महिमा, महिषासुर-शुंभ-निशुंभ वध, चंडी पाठ का फल।
  • अध्याय 20 — दुर्गा पूजा विधि: नवरात्र व्रत विधान, नवदुर्गा पूजन एवं बलि सम्प्रेषण।
  • अध्याय 21 — इंद्र ध्वज विधि: इंद्रध्वज स्थापना तथा राष्ट्र कल्याण हेतु अनुष्ठान।
  • अध्याय 22 — वासुदेव पूजा विधि: भगवान वासुदेव का षोडशोपचार पूजन एवं पुरुषसूक्त मन्त्र विधान।
  • अध्याय 23 — विष्णु पूजा अष्टोत्तरशत नाम: विष्णु के 108 दिव्य नाम तथा उनका फल।
  • अध्याय 24 — प्रदोष व्रत विधि: त्रयोदशी प्रदोष काल में शिव पूजन एवं व्रत महिमा।
  • अध्याय 25 — एकादशी व्रत विधि: एकादशी व्रत का नियम, रात्रि जागरण एवं पापविमोचन।
  • अध्याय 26 — संक्रांति पूजा विधि: मकर संक्रांति स्नान, दान एवं पितृ तर्पण।
  • अध्याय 27 — ग्रहयज्ञ विधि: नवग्रह मंडल निर्माण, समिधा एवं शांति होम।
  • अध्याय 28 — षोडश संस्कार विधि: गर्भाधान से विवाह तक के १६ पवित्र संस्कार।
  • अध्याय 29 — पितृ तर्पण विधि: जल, तिल और कुश द्वारा पितरों का तर्पण।
  • अध्याय 30 — श्राद्ध विधि: महालय श्राद्ध, पिंड दान एवं पितृ प्रसन्नता।
  • अध्याय 31 — तीर्थ माहात्म्य: प्रयाग, काशी, गया, कुरुक्षेत्र आदि तीर्थों का फल।
  • अध्याय 32 — दान माहात्म्य: गोदान, भूदान, स्वर्णदान आदि दश महादानों की महिमा।
  • अध्याय 33 — प्रायश्चित्त विधि: अज्ञानवश किए गए पापों के निवारण हेतु कृच्छ्र-चांद्रायण व्रत।
  • अध्याय 34 — वर्णाश्रम धर्म: चारों वर्णों एवं आश्रमों के कर्तव्य और मर्यादाएँ।
  • अध्याय 35 — राजधर्म: राजा के कर्तव्य, दंडनीति एवं प्रजापालन।
  • अध्याय 36 — आपद्धर्म: संकटकाल में धर्म के लचीले नियम।
  • अध्याय 37 — मोक्षधर्म: ज्ञान, कर्म और भक्ति योग द्वारा मोक्ष प्राप्ति।
  • अध्याय 38 — युग धर्म वर्णन: चारों युगों के धर्म तथा कलयुग में नाम संकीर्तन महिमा।
  • अध्याय 39 — ब्रह्मांड वर्णन: सप्त द्वीप, पर्वत, नदियाँ एवं भूगोल का वर्णन।
  • अध्याय 40 — काल वर्णन: निमेष से लेकर ब्रह्मा की आयु तक का समय चक्र।
  • अध्याय 41 — लिंग प्रतिष्ठा विधि: शिवलिंग के प्रकार एवं प्रतिष्ठा मन्त्र।
  • अध्याय 42 — प्रासाद लक्षण: मंदिर वास्तुकला — नागर, द्रविड़, वेसर शैली।
  • अध्याय 43 — मूर्ति लक्षण: मूर्तिकला के तालमान एवं लक्षण।
  • अध्याय 44 — विष्णु प्रतिमा लक्षण: भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों की मूर्ति निर्माण विधि।
  • अध्याय 45 — शिव मूर्ति लक्षण: सदाशिव, नटराज, अर्धनारीश्वर मूर्ति लक्षण।
  • अध्याय 46 — देवी प्रतिमा लक्षण: महिषासुरमर्दिनी, काली, लक्ष्मी, सरस्वती मूर्ति लक्षण।
  • अध्याय 47 — मंडप विधि: मंदिर के मंडपों का निर्माण और पूजन।
  • अध्याय 48 — गोपुर प्राकार विधि: मंदिर के द्वारों, गोपुरों तथा प्राकारों का निर्माण।
  • अध्याय 49 — आगम सार: ज्ञान, योग, क्रिया, चर्या रूपी चार पादों का सिद्धांत।
  • अध्याय 50 — होम विधि: कुंड निर्माण, समिधा एवं आहुति विधान।
  • अध्याय 51 — कलश स्थापना विधि: नवधान्य, पंचरत्न युक्त पूर्णकलश पूजन।
  • अध्याय 52 — पंचामृत अभिषेक विधि: दूध, दही, घृत, मधु, शर्करा द्वारा अभिषेक।
  • अध्याय 53 — नैवेद्य विधि: भगवान के लिए पवित्र नैवेद्य एवं निवेदन।
  • अध्याय 54 — दीपाराधना विधि: नीराजन (आरती) की महिमा और विधि।
  • अध्याय 55 — उत्सव विधि: देवालय के वार्षिक उत्सव एवं रथयात्रा।
  • अध्याय 56 — प्रतिमा शोधन विधि: मूर्तियों का जलाधिवास एवं धान्याधिवास परीक्षण।
  • अध्याय 57 — प्रतिष्ठा विधि सामान्य: सात दिनों का प्रतिष्ठा अधिवास क्रम।
  • अध्याय 58 — अंकुरार्पण, अधिवास विधि: नवधान्य अंकुरारोपण एवं शय्याधिवास।
  • अध्याय 59 — आधिवास कथन: प्रतिष्ठा का पूर्वरंग एवं शांति होम।
  • अध्याय 60 — वासुदेव प्रतिष्ठा विधि: मुख्य वासुदेव मूर्ति प्रतिष्ठा एवं प्राणप्रतिष्ठा।
  • अध्याय 61 — द्वार प्रतिष्ठा ध्वजारोहणादि विधि: मंदिर द्वार एवं ध्वजदंड स्थापना।
  • अध्याय 62 — लक्ष्मी प्रतिष्ठा विधि: महालक्ष्मी कलश स्थापना एवं श्रीसूक्त पूजन।
  • अध्याय 63 — सुदर्शन चक्रादि प्रतिष्ठा: सुदर्शन चक्र, गरुड़ एवं नृसिंह प्रतिष्ठा।
  • अध्याय 64 — कूपादि प्रतिष्ठा कथन: कूप, वापी, तड़ाग निर्माण एवं प्रतिष्ठा का पुण्य।
  • अध्याय 65 — सभादि स्थापन कथन: धर्मशाला, भवन एवं गृह प्रवेश वास्तु।
  • अध्याय 66 — साधारण प्रतिष्ठा विधान: सामूहिक देव-प्रतिष्ठा एवं आराम-सत्र दान।
  • अध्याय 67 — जीर्णोद्धार विधान: खंडित मूर्तियों का विसर्जन एवं नवीन प्रतिष्ठा।
  • अध्याय 68 — यात्रोत्सव विधि कथन: नगर प्रदक्षिणा एवं नौका-पुष्प यात्रा।
  • अध्याय 69 — स्नान विधान / यज्ञावभृथ स्नान: १०८ कलशों का स्नान एवं अवभृथ स्नान।
  • अध्याय 70 — वृक्षादि प्रतिष्ठा कथन: वृक्षारोपण एवं उपवन प्रतिष्ठा का महापुण्य।
  • अध्याय 71 — गणेश पूजा विधि: विघ्नहर्ता गणेश पूजन एवं चतुर्थी व्रत।
  • अध्याय 72 — स्नान विशेषादि कथन: मन्त्र स्नान, भस्म स्नान आदि नव स्नान।
  • अध्याय 73 — सूर्य पूजा विधि: द्वादशादित्य अर्चन एवं संध्या अर्घ्य।
  • अध्याय 74 — शिव पूजा विधि: शिव पूजन, बिल्वपत्र अर्पण एवं पंचाक्षर जप।
  • अध्याय 75 — अग्नि स्थापनादि विधि: अमुक होम एवं बाह्य-अंतर बलि।
  • अध्याय 76 — चंड पूजा वर्णन: चंडेश्वर पूजन एवं निर्माल्य समर्पण।
  • अध्याय 77 — कपिला पूजादि विधान: कपिला गौ पूजन एवं गृह-उपकरण पूजन।
  • अध्याय 78 — पवित्रारोहण विधि: सूत/कुश के पवित्रक द्वारा शिव अर्चन।
  • अध्याय 79 — पवित्रारोहण विधि (क्रम): तत्त्व मन्त्रों से पवित्रक अर्पण।
  • अध्याय 80 — दमनकारोपण विधि: चैत्र मास में दमनक (मरुआ) द्वारा शिव पूजन।
  • अध्याय 81 — समय दीक्षा विधान: शिव दीक्षा का प्रारंभ एवं पाशमोचन।
  • अध्याय 82 — संस्कार दीक्षा विधि: आत्मा का शोधन एवं गुरु उपदेश।
  • अध्याय 83 — निर्वाण दीक्षा अधिवास विधि: पंचकला शोधन एवं रात्रि जागरण।
  • अध्याय 84 — निर्वाण दीक्षा विधि / निवृत्ति कला शोधन: १०८ भुवनाधारित पृथ्वी तत्त्व शोधन।
  • अध्याय 85 — प्रतिष्ठा कला शोधन: ५६ भुवनाधारित जल तत्त्व शोधन।
  • अध्याय 86 — विद्या कला शोधन: २५ भुवनाधारित अग्नि तत्त्व शोधन।
  • अध्याय 87 — शांति कला शोधन: १४ भुवनाधारित वायु तत्त्व शोधन।
  • अध्याय 88 — शांत्यतीत कला शोधन: ८ भुवनाधारित आकाश व गुणातीत शोधन, शिखाच्छेदन।
  • अध्याय 89 — एकतत्त्व दीक्षा विधि: संक्षिप्त दीक्षा विधान।
  • अध्याय 90 — अभिषेकादि विधि: दीक्षांतर अभिषेक, माला-मुकुट धारण।
  • अध्याय 91 — विविध मंत्रादयः: मन्त्र बीजाक्षर एवं जप संख्या निर्धारण।
  • अध्याय 92 — वास्तु प्रतिष्ठा विधि / शिला न्यास विधि: भूमि परीक्षा एवं शिलान्यास।
  • अध्याय 93 — वास्तु पूजा विधान: ६४ व ८१ पद वास्तु मंडल पूजन।
  • अध्याय 94 — शिला न्यास विधान: नंदा, भद्रा आदि पाँच मुख्य शिलाओं का न्यास।
  • अध्याय 95 — प्रतिष्ठा मासादि सामग्री: शुभ मुहूर्त, नक्षत्र एवं अधिवास सामग्री।
  • अध्याय 96 — अधिवासन विधि: शिवकुंभ स्थापना एवं रात्रि वेद पाठ।
  • अध्याय 97 — शिव प्रतिष्ठा विधान: गर्भगृह में शिवलिंग प्रतिष्ठा एवं प्राणप्रतिष्ठा।
  • अध्याय 98 — गौरी प्रतिष्ठा विधान: भगवती गौरी/पार्वती की प्रतिष्ठा।
  • अध्याय 99 — सूर्य प्रतिष्ठा विधान: सूर्य प्रतिमा की प्रतिष्ठा विधि।
  • अध्याय 100 — द्वार प्रतिष्ठा विधान: मंदिर द्वार स्थापना एवं रक्षौषधि बंधन।

अध्याय 101 से 200: तंत्र, पूजा-पद्धति, संस्कार एवं विविध व्रत

  • अध्याय 101 — सामान्य लिंगार्चना निरूपणम्: नित्य शिवलिंग पूजा विधान।
  • अध्याय 102 — महालिंगार्चन विधि: अष्टदल कमल पर महालिंग पूजन एवं पंचामृत फल।
  • अध्याय 103 — पूजा विधान: षोडशोपचार पूजन क्रम एवं भक्ति भाव का महत्व।
  • अध्याय 104 — विशेष पूजा विधि: नवग्रह एवं दिक्पाल पूजन।
  • अध्याय 105 — यंत्र पूजा विधि: श्रीचक्र, दुर्गा यंत्र आदि का आलेखन व पूजन।
  • अध्याय 106 — मंत्र जप विधि: वाचिक, उपांशु, मानस जप एवं पुरश्चरण।
  • अध्याय 107 — होम विधि: शांति, पुष्टि आदि हेतु कुण्ड व समिधा।
  • अध्याय 108 — प्रतिमा प्रतिष्ठा विधि: देव प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा।
  • अध्याय 109 — शांति होम विधि: अरिष्ट निवृत्त्यर्थ शांति होम।
  • अध्याय 110 — ग्रह शांति विधि: नवग्रहों की दशा शांति एवं दान।
  • अध्याय 111 — आयुष्या होम: दीर्घायु हेतु महामृत्युंजय होम।
  • अध्याय 112 — पुंसवन संस्कार: तृतीय मास में उत्तम संतान प्राप्ति हेतु संस्कार।
  • अध्याय 113 — जातकर्म संस्कार: नवजात शिशु हेतु मेधाजनन आदि कर्म।
  • अध्याय 114 — नामकरण संस्कार: शिशु का नामकरण विधान।
  • अध्याय 115 — उपनयन संस्कार: यज्ञोपवीत धारण एवं गायत्री उपदेश।
  • अध्याय 116 — समावर्तन संस्कार: विद्याध्ययन पूर्ण होने पर स्नातकोत्सव।
  • अध्याय 117 — विवाह संस्कार: अष्टविध विवाह, पाणिग्रहण एवं सप्तपदी।
  • अध्याय 118 — अंत्येष्टि विधि: दाह संस्कार एवं पिण्डोदक क्रिया।
  • अध्याय 119 — श्राद्ध कल्प: पार्वण एवं एकोद्दिष्ट श्राद्ध।
  • अध्याय 120 — आशौच निरूपण: जन्म-मरण अशौच (सूतक-पातक) के नियम।
  • अध्याय 121 — तीर्थ माहात्म्य: देव, आर्ष, पितृ, मानव तीर्थों की महिमा।
  • अध्याय 122 — गंगा माहात्म्य: पतित पावनी गंगा का अवतरण व स्नान फल।
  • अध्याय 123 — प्रयाग माहात्म्य: त्रिवेणी संगम एवं माघ स्नान फल।
  • अध्याय 124 — काशी माहात्म्य: अविमुक्त क्षेत्र काशी व तारक मन्त्र मोक्ष।
  • अध्याय 125 — नाना तीर्थ माहात्म्य: कुरुक्षेत्र, गया, मथुराबद्रिकाश्रम आदि तीर्थ।
  • अध्याय 126 — दशावतार कथन: विष्णु के दस मुख्य अवतारों का संक्षेप।
  • अध्याय 127 — रामायण संग्रह: वाल्मीकि रामायण का संक्षिप्त आख्यान।
  • अध्याय 128 — महाभारत संग्रह: महाभारत कथा, अष्टादश पर्व एवं गीतासार।
  • अध्याय 129 — अर्घ्यकांड वर्णन: देवताओं को अर्घ्य दान की विधि।
  • अध्याय 130 — मंडल वर्णन: पूजा हेतु सर्वतोभद्र आदि मंडल।
  • अध्याय 131 — घाट चक्रादि वर्णन: तंत्र विद्या के विभिन्न चक्र।
  • अध्याय 132 — सेवा चक्र वर्णन: आवरण देवताओं की सेवा-पूजा।
  • अध्याय 133 — नानाबल्यादि वर्णन: भूत, यक्ष, दिक्पाल बलि।
  • अध्याय 134 — त्रैलोक्य विजय प्रयोग: त्रैलोक्यविजय मन्त्र साधना।
  • अध्याय 135 — संग्राम विजय विधि: युद्ध में विजय हेतु रक्षा-कवच व पूजन।
  • अध्याय 136 — नक्षत्र चक्र वर्णन: २७ नक्षत्रों के फल एवं मुहूर्त।
  • अध्याय 137 — महामारी विद्या: शीतला देवी पूजन व महामारी निवारण।
  • अध्याय 138 — षट्कर्म निरूपण: शांति, वश्य, स्तंभनादि षट्कर्म के नियम।
  • अध्याय 139 — षष्टि संवत्सर फल: ६० संवत्सरों के नाम व शुभाशुभ फल।
  • अध्याय 140 — वश्यादि योग कथन: ज्योतिषी योग व ग्रह बाधा शांति।
  • अध्याय 141 — षट्त्रिंशत् पदकादि वर्णन: ३६ तत्त्वों का पदका चक्र।
  • अध्याय 142 — मंत्रौषधादि वर्णन: मन्त्र एवं दिव्य जड़ी-बूटियों का प्रयोग।
  • अध्याय 143 — कुब्जिका पूजा विधि (प्रथमा): कुब्जिका देवी का तांत्रिक पूजन।
  • अध्याय 144 — कुब्जिका पूजा विधि (द्वितीया): आवरण पूजा व कुब्जिका होम।
  • अध्याय 145 — मालिनी नानानाम स्तोत्र: ५० मातृका वर्णों की मालिनी स्तुति।
  • अध्याय 146 — अष्टाष्टका देव्यः: ६४ योगिनियों का मंडल।
  • अध्याय 147 — त्वरित पूजादि वर्णन: त्वरित देवी की साधना।
  • अध्याय 148 — संग्राम विजय पूजादि: भद्रकाली व दुर्गा मन्त्र साधना।
  • अध्याय 149 — लक्ष होम विधि: एक लाख आहुतियों का महायज्ञ।
  • अध्याय 150 — मन्वंतर वर्णन: चौदह मन्वंतरों की विस्तृत काल-गणना।
  • अध्याय 151 — वर्णाश्रमेतर धर्म कथन: सभी मनुष्यों के सामान्य धर्म (अहिंसा, सत्य आदि)।
  • अध्याय 152 — गृहस्थ वृत्ति वर्णन: गृहस्थ के पाँच महायज्ञ एवं धर्म आचरण।
  • अध्याय 153 — ब्रह्मचर्य आश्रम धर्म: गुरुुकुल वास, स्वाध्याय एवं संयम।
  • अध्याय 154 — विवाह धर्म विशेष: विवाह के निषिद्ध संबंध व धर्मपत्नी के कर्तव्य।
  • अध्याय 155 — आचार धर्म कथन: सदाचार, दिनचर्या व भोजन नियम।
  • अध्याय 156 — द्रव्य शुद्धि निरूपण: पात्रों, वस्त्रों व अन्न की शुद्धि।
  • अध्याय 157 — शवाशौच निरूपण: मरण अशौच के नियम व शुद्धि।
  • अध्याय 158 — सूतकाशौच निरूपण: जन्म अशौच के नियम।
  • अध्याय 159 — असंस्कृताशौच वर्णन: असंस्कृत व्यक्तियों के अशौच नियम।
  • अध्याय 160 — वानप्रस्थ धर्म वर्णन: वानप्रस्थियों के नियम व तपस्या।
  • अध्याय 161 — यति धर्म वर्णन: संन्यासियों के भेद (कुटीचक, बहुदक, हंस, परमहंस)।
  • अध्याय 162 — धर्मशास्त्र वर्णन: स्मृतियों की प्रमाणिकता व धर्म निर्णय।
  • अध्याय 163 — श्राद्ध कल्प निरूपण: वार्षिक श्राद्ध की विस्तृत विधि।
  • अध्याय 164 — नवग्रह होम निरूपण: नवग्रह यज्ञ एवं दान वस्तुएँ।
  • अध्याय 165 — नानाधर्म निरूपण: आत्मज्ञान रूपी दीपक व संसार तरण।
  • अध्याय 166 — वर्णधर्मादि कथन: पाँच प्रकार के धर्म व आठ आत्मगुण।
  • अध्याय 167 — अयुत, लक्ष, कोटि होम विधि: विशाल यज्ञों की विधियाँ।
  • अध्याय 168 — महापातकादि प्रायश्चित्त: ब्रह्महत्या, सुरापान आदि महापाप।
  • अध्याय 169 — प्रायश्चित्त निरूपण: महापापों के प्रायश्चित्त व्रत।
  • अध्याय 170 — पुनः प्रायश्चित्त वर्णन: पतित संसर्ग दोष निवारण।
  • अध्याय 171 — रहस्य प्रायश्चित्त निरूपण: पुरुषसूक्त व अघमर्षण सूक्त द्वारा पापनाश।
  • अध्याय 172 — पाप नाशन स्तोत्र: सर्वपाप नाशक श्रीविष्णु स्तोत्र।
  • अध्याय 173 — प्रायश्चित्त निरूपण (क्रम): निषिद्ध भोजन आदि के प्रायश्चित्त।
  • अध्याय 174 — देवाश्रमार्चन प्रायश्चित्त: पूजन त्रुटियों का प्रायश्चित्त।
  • अध्याय 175 — व्रत परिभाषा: उपवास नियम एवं १० सामान्य धर्म।
  • अध्याय 176 — प्रतिपद व्रत वर्णन: प्रथमा तिथि के व्रत व ब्रह्मा पूजन।
  • अध्याय 177 — द्वितीया व्रत वर्णन: विष्णु-लक्ष्मी पूजन व अशून्यशयन व्रत।
  • अध्याय 178 — तृतीया व्रत वर्णन: गौरी-शिव पूजा व सौभाग्य शयन व्रत।
  • अध्याय 179 — चतुर्थी व्रत वर्णन: गणेश चतुर्थी व संकटनाशन चतुर्थी।
  • अध्याय 180 — पंचमी व्रत वर्णन: नागपंचमी व अष्टनाग पूजन।
  • अध्याय 181 — षष्ठी व्रत वर्णन: स्कंद षष्ठी व कार्तिकेय पूजन।
  • अध्याय 182 — सप्तमी व्रत वर्णन: रथसप्तमी व सूर्य पूजन।
  • अध्याय 183 — जन्माष्टमी व्रत वर्णन: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत, रात्रि जागरण व अर्घ्य।
  • अध्याय 184 — अष्टमी व्रत वर्णन: कालाष्टमी, बुधाष्टमी, अशोकाष्टमी।
  • अध्याय 185 — नवमी व्रत वर्णन: महानवमी, दुर्गा पूजा व बलि विधान।
  • अध्याय 186 — दशमी व्रत वर्णन: दशमी नियम व विप्र पूजन।
  • अध्याय 187 — एकादशी व्रत वर्णन: एकादशी व्रत की असीम महिमा व विधि।
  • अध्याय 188 — द्वादशी व्रत वर्णन: १४ प्रमुख द्वादशी व्रत (मदन, भीमादि)।
  • अध्याय 189 — श्रवण द्वादशी व्रत वर्णन: वामन रूप पूजन व श्रवण द्वादशी।
  • अध्याय 190 — अखंड द्वादशी व्रत वर्णन: त्रुटित व्रतों की पूर्णता हेतु अखंड द्वादशी।
  • अध्याय 191 — त्रयोदशी व्रत वर्णन: अनंग त्रयोदशी व कामदेव पूजन।
  • अध्याय 192 — चतुर्दशी व्रत वर्णन: अनंत चतुर्दशी व अनंत सूत्र धारण।
  • अध्याय 193 — शिवरात्रि व्रत वर्णन: महाशिवरात्रि व्रत, चार पहर पूजा व सुंदरसेन कथा।
  • अध्याय 194 — अशोक पूर्णिमा-अमावस्या व्रत वर्णन: वटसावित्री व्रत व सत्यवान-सावित्री पूजन।
  • अध्याय 195 — वार व्रत वर्णन: रवि आदि वारों के व्रत व आदित्यहृदय।
  • अध्याय 196 — नक्षत्र व्रत वर्णन: २७ नक्षत्रों के व्रत व नक्षत्रपुरुष विष्णु।
  • अध्याय 197 — दिवस व्रत वर्णन: धेनु व्रत, कल्पवृक्ष व्रत।
  • अध्याय 198 — मास व्रत वर्णन: चातुर्मास्य व्रत व वैशाख-माघ स्नान।
  • अध्याय 199 — नाना व्रत वर्णन: ऋतु व्रत, सरस्वती व्रत, उमा व्रत।
  • अध्याय 200 — दीपदान व्रत वर्णन: दीपदान का महापुण्य व विदर्भ राजकुमारी ललिता की कथा।

अध्याय 201 से 300: मन्त्र शास्त्र, राजनीति, आयुर्वेद एवं पशु-चिकित्सा

  • अध्याय 201 — शत्रुजय विधानम: शत्रु शमन मन्त्र व दुर्गा कवच।
  • अध्याय 202 — कृत्या विधानम: अभिचार-बाधा निवारण।
  • अध्याय 203 — शांति कर्म विधानम: उपद्रव व ग्रह शांति होम।
  • अध्याय 204 — वश्य कर्म विधानम: कामदेव-रति मन्त्र व वशीकरण।
  • अध्याय 205 — आकर्षण कर्म विधानम: लक्ष्मी व सरस्वती मन्त्र प्रयोग।
  • अध्याय 206 — स्तंभन कर्म विधानम: भय व शत्रु स्तंभन।
  • अध्याय 207 — विद्वेषण कर्म विधानम: अधर्मियों में विद्वेषण।
  • अध्याय 208 — उच्चाटन कर्म विधानम: उग्रभैरव साधना।
  • अध्याय 209 — मारण कर्म विधानम: केवल धर्मरक्षार्थ अत्यंत उग्र मन्त्र चेतावनी।
  • अध्याय 210 — मंत्र सिद्धि विधानम: जप भेद, ऋषि-छंद-बीज न्यास।
  • अध्याय 211 — यंत्र पूजा विधानम: श्रीयंत्र, सुदर्शन यंत्र निर्माण।
  • अध्याय 212 — पूजा विधानम: विष्णु नित्य पूजा क्रम।
  • अध्याय 213 — नाना देवता पूजा विधानम: गणेश, सूर्य, दुर्गादि सर्वदेव पूजन।
  • अध्याय 214 — शिव पूजा विधानम: पंचाक्षर मन्त्र व रुद्राभिषेक।
  • अध्याय 215 — देवी पूजा विधानम: नवारण पूजा व कुमारी पूजन।
  • अध्याय 216 — सूर्य पूजा विधानम: त्रिकाल संध्या व सूर्य गायत्री।
  • अध्याय 217 — गणेश पूजा विधानम: गणेश २१ नाम व दूर्वार्पण।
  • अध्याय 218 — स्कंद पूजा विधानम: षडाक्षर मन्त्र व कार्तिकेय पूजन।
  • अध्याय 219 — विष्णु सहस्रनाम विधानम: विष्णु सहस्रनाम पाठ व फलश्रुति।
  • अध्याय 220 — कवच विधानम: नारायण कवच, शिव कवच, देवी कवच।
  • अध्याय 221 — तीर्थ माहात्म्यम: भारत की पवित्र नदियों व तीर्थों की महिमा।
  • अध्याय 222 — दान माहात्म्यम: सात्विक दान की महिमा।
  • अध्याय 223 — व्रत माहात्म्यम: व्रतों का आध्यात्मिक फल।
  • अध्याय 224 — श्राद्ध कर्म विधानम: पितृपक्ष श्राद्ध विधि।
  • अध्याय 225 — पितृ तर्पण विधानम: नित्य पितृ तर्पण क्रम।
  • अध्याय 226 — अग्नि कार्य विधानम: त्रेताग्नि (अग्निहोत्र) रक्षण।
  • अध्याय 227 — सोम याग विधानम: सोमयाग के विभिन्न रूप।
  • अध्याय 228 — अश्वमेध विधानम: चक्रवर्ती सम्राटों का अश्वमेध यज्ञ।
  • अध्याय 229 — राजसूय विधानम: राजसूय यज्ञ व सम्राट अभिषेक।
  • अध्याय 230 — जप माहात्म्यम: जप की श्रेष्ठता व विभिन्न मालाएँ।
  • अध्याय 231 — ध्यान योग विधानम: षट्चक्र भेदन व कुंडलिनी जागरण।
  • अध्याय 232 — प्राणायाम विधानम: पूरक, कुंभक, रेचक प्राणायाम।
  • अध्याय 233 — षडंग योग विधानम: अष्टांग योग के ६ प्रमुख अंग।
  • अध्याय 234 — आत्म ज्ञान विधानम: तुरीयावस्था व ‘अहं ब्रह्मास्मि’।
  • अध्याय 235 — मोक्ष माहात्म्यम: चतुर्विध योग व मोक्ष लाभ।
  • अध्याय 236 — आयुर्वेद प्रारंभ: धन्वंतरि अवतरण व अष्टांग आयुर्वेद।
  • अध्याय 237 — वात दोष चिकित्सा: वात रोगों के लक्षण व अभ्यंग।
  • अध्याय 238 — पित्त दोष चिकित्सा: पित्त विकार, विरेचन व घृत।
  • अध्याय 239 — कफ दोष चिकित्सा: कफ रोग व वमन क्रिया।
  • अध्याय 240 — सप्तधातु वर्णनम: रसादि सात धातुएँ व ओज।
  • अध्याय 241 — पंचमहाभूत शरीर संबंधः: पंचभूतों का देह संबंध।
  • अध्याय 242 — द्रव्यगुण विधानम: औषधियों के रस-वीर्य-विपाक।
  • अध्याय 243 — अन्न पान विधि: पथापथ्य व आहार नियम।
  • अध्याय 244 — ऋतु चर्या विधानम: छः ऋतुओं का स्वास्थ्य नियम।
  • अध्याय 245 — रसायन विधानम: कुटीप्रावेशिक रसायन व कायाकल्प।
  • अध्याय 246 — वाजीकरण विधानम: देह बल व शुक्र वृद्धि।
  • अध्याय 247 — बाल चिकित्सा: कौमारभृत्य व बालरोग।
  • अध्याय 248 — अगद तंत्र: विष विज्ञान व सर्पदंश चिकित्सा।
  • अध्याय 249 — शल्य तंत्र: शल्य चिकित्सा व यंत्र-शस्त्र।
  • अध्याय 250 — शालाक्य तंत्र: आँख, कान, नाक, गले के रोग।
  • अध्याय 251 — ज्योतिष प्रारंभ: काल चक्र व २७ नक्षत्र।
  • अध्याय 252 — ग्रह वर्णनम: नवग्रह स्वरूप व रत्न।
  • अध्याय 253 — नक्षत्र वर्णनम: नक्षत्रों का फल व मुहूर्त।
  • अध्याय 254 — मुहूर्त विधानम: पंचांग शुद्धि व शुभ समय।
  • अध्याय 255 — होरा शास्त्र: १२ राशियाँ व १२ भाव फल।
  • अध्याय 256 — गर्भ लक्षणम: भ्रूण विकास व गर्भिणी परिचर्या।
  • अध्याय 257 — जातक कर्म विधानम: जन्मांग चक्र व जातकर्म।
  • अध्याय 258 — उपनयन विधानम: यज्ञोपवीत हेतु ज्योतिष मुहूर्त।
  • अध्याय 259 — विवाह विधानम: विवाह मेलपक व गुण मिलान।
  • अध्याय 260 — श्राद्ध कल्प: पितृयज्ञ हेतु समय निर्धारण।
  • अध्याय 261 — प्रायश्चित्त विधानम: आत्म-शोधन प्रायश्चित्त।
  • अध्याय 262 — धर्म शास्त्र संग्रह: स्वधर्म पालन व वर्णाश्रम नियम।
  • अध्याय 263 — राजनीति शास्त्र: राजा के ७ अंग व दिनचर्या।
  • अध्याय 264 — दंड नीति: साम-दान-भेद-दंड व न्याय।
  • अध्याय 265 — आगम तंत्र विधानम: २८ शिवागम व पांचरात्र।
  • अध्याय 266 — प्रासाद लक्षणम: वास्तु पुरुष मंडल व मंदिर शैली।
  • अध्याय 267 — मूर्ति लक्षणम: मूर्तियों की माप व चिन्ह।
  • अध्याय 268 — वास्तु शास्त्र विधानम: ८१ पद गृह वास्तु।
  • अध्याय 269 — छत्रादि मन्त्रादयः: छत्र, ध्वज, अस्त्र मन्त्र।
  • अध्याय 270 — विष्णु पंजर: विष्णु पंजर स्तोत्र व रक्षा।
  • अध्याय 271 — वेद शाखादि कीर्तनम: ४ वेदों की विभिन्न शाखाएँ।
  • अध्याय 272 — दानादि माहात्म्यम: १८ पुराणों के दान का फल।
  • अध्याय 273 — सूर्य वंश वर्णनम: सूर्यवंश के प्रतापी राजा।
  • अध्याय 274 — सोम वंश वर्णनम: चंद्रवंश व तारा-सोम कथा।
  • अध्याय 275 — यदु वंश वर्णनम: यदुवंश, स्यमंतक मणि व श्रीकृष्ण।
  • अध्याय 276 — द्वादश संग्रामाः: देवासुर १२ संग्राम।
  • अध्याय 277 — राज वंश वर्णनम: तुर्वसु, द्रुह्यु व अनु वंश।
  • अध्याय 278 — पुरु वंश वर्णनम: दुष्यंत, भरत, कुरु व पांडव वंश।
  • अध्याय 279 — सिद्ध औषधानि: ज्वरादि रोगों की धन्वंतरि औषधियाँ।
  • अध्याय 280 — सर्व रोग हराण्यौषधानि: त्रिदोष नाशक जड़ी-बूटियाँ।
  • अध्याय 281 — रसादि लक्षणम: षड्रस, विपाक व क्वाथ निर्माण।
  • अध्याय 282 — वृक्षायुर्वेद: वृक्षारोपण व पादप चिकित्सा।
  • अध्याय 283 — नाना रोग हराण्यौषधानि: बालरोग व त्रिफ़ला कल्प।
  • अध्याय 284 — मन्त्र रूप औषध कथनम्: विष्णु के नाम ही औषध हैं।
  • अध्याय 285 — मृत संजीवन कर सिद्ध योगः: मृतसंजीवनी समान औषधियाँ।
  • अध्याय 286 — मृत्युंजय कल्पाः: दीर्घायु प्रदायक कल्प।
  • अध्याय 287 — गज चिकित्सा: पालकाप्य प्रोक्त हस्ती आयुर्वेद।
  • अध्याय 288 — अश्व वाहन सारः: शालिहोत्र प्रोक्त अश्व आयुर्वेद।
  • अध्याय 289 — अश्व लक्षण चिकित्साकम्: श्रेष्ठ अश्व के लक्षण व उपचार।
  • अध्याय 290 — अश्व शांतिः: अश्व शांति होम विधि।
  • अध्याय 291 — गज शांतिः: गज शांति एवं अष्टदिग्गज पूजन।
  • अध्याय 292 — गवायुर्वेद: गो-महिमा व पंचगव्य कल्प।
  • अध्याय 293 — मन्त्र परिभाषा: स्त्री-पुं-नपुंसक मन्त्र वर्गीकरण।
  • अध्याय 294 — सर्प लक्षणानि: ८ मुख्य नाग व दंश लक्षण।
  • अध्याय 295 — दष्ट चिकित्सा: गरुड़ मन्त्र व सर्प विष उपचार।
  • अध्याय 296 — पंचांग रुद्रेण दष्ट चिकित्सा: पंचांग रुद्र मन्त्र से विष शमन।
  • अध्याय 297 — विषहृन्मंत्रौषधम्: नीलकंठ मन्त्र व विषहारी लेप।
  • अध्याय 298 — गोनसादि चिकित्सा: बिच्छू, मकड़ी व विभिन्न सर्प दंश।
  • अध्याय 299 — बाल ग्रह हरण तंत्रम्: बाल ग्रहों की शांति व बलि।
  • अध्याय 300 — ग्रहहृन्मंत्रादिकम्: उन्माद शांति व महामृत्यंजय।

अध्याय 301 से 383: आयुर्वेद, साहित्य, व्याकरण एवं अद्वैत आत्मज्ञान

  • अध्याय 301 — आयुर्वेद: प्राणभव निरूपण: पंच प्राण एवं देह रक्षण।
  • अध्याय 302 — वातादि रोग निरूपण: वात-पित्त-कफ रोगों के लक्षण।
  • अध्याय 303 — रोगोपक्रम निरूपण: संशोधन व शमन चिकित्सा।
  • अध्याय 304 — द्रव्यगुण निरूपण: १० युग्म गुण व षड्रस।
  • अध्याय 305 — कल्पस्थान: ओषध निरूपण: दशमूल व त्रिफ़ला योग।
  • अध्याय 306 — रसायन निरूपण: कायाकल्प व रसायन द्रव्य।
  • अध्याय 307 — बालरोग निरूपण (कौमारभृत्य): धात्री चयन व शिशु रक्षा।
  • अध्याय 308 — विषतंत्र निरूपण (अगदतंत्र): स्थावर व जंगम विष।
  • अध्याय 309 — शल्य-शालाक्य निरूपण: शल्य क्रिया व ऊर्ध्वजत्रु रोग।
  • अध्याय 310 — आयुर्वेद उपसंहार: धन्वंतरि स्तुति व स्वास्थ्य फल।
  • अध्याय 311 — अश्वशास्त्र निरूपण: घोड़ों की चाल व लक्षण।
  • अध्याय 312 — गजायुर्वेद निरूपण: हाथियों का आयुर्वेद व उपचार।
  • अध्याय 313 — धनुर्वेद निरूपण: अस्त्र-शस्त्र, सेना व व्यूह रचना।
  • अध्याय 314 — दंडनीति निरूपण: राजा के ७ अंग व शासन।
  • अध्याय 315 — नीतिशास्त्र उपसंहार: नीति वचन व राजधर्म।
  • अध्याय 317 — ज्योतिष निरूपण: ग्रहादि स्वरूप: नवग्रह व २७ नक्षत्र।
  • अध्याय 318 — जातक निरूपण: राशि स्वरूप: १२ राशियाँ व भाव फल।
  • अध्याय 319 — दशा निरूपण: विंशोत्तरी १२-वर्षीय महादशा।
  • अध्याय 320 — मुहूर्त निरूपण: शुभ कार्य हेतु मुहूर्त चयन।
  • अध्याय 321 — वर्ष फल निरूपण (ताजिक): वार्षिक वर्षफल पद्धति।
  • अध्याय 322 — शकुन निरूपण: शुभाशुभ शकुन व शांति।
  • अध्याय 323 — स्वप्न निरूपण: स्वप्न फल व पापनाशक स्नान।
  • अध्याय 324 — रत्न निरूपण: नवरत्न परीक्षा व लाभ।
  • अध्याय 325 — प्रासाद निरूपण (वास्तुशास्त्र): मंदिर निर्माण शैलियाँ।
  • अध्याय 326 — ग्राम देवता प्रतिष्ठा: सीमा/ग्राम देवताओं की प्रतिष्ठा।
  • अध्याय 327 — लिंग प्रतिष्ठा निरूपण: शिवलिंग प्रतिष्ठा विधि।
  • अध्याय 328 — विष्णु प्रतिष्ठा निरूपण: विष्णु मूर्ति प्रतिष्ठा।
  • अध्याय 329 — देवी प्रतिष्ठा निरूपण: दुर्गा-लक्ष्मी-काली प्रतिष्ठा।
  • अध्याय 330 — तीर्थ माहात्म्य निरूपण: ज्ञान, क्षेत्र व देह तीर्थ।
  • अध्याय 331 — श्राद्ध निरूपण: पितृ श्राद्ध व पिंड दान।
  • अध्याय 332 — दान निरूपण: १६ महादान व सुवर्ण दान।
  • अध्याय 333 — व्रत निरूपण: तिथि व्रतों की कथा व फल।
  • अध्याय 334 — प्रायश्चित्त निरूपण: पाप क्षालन प्रायश्चित्त।
  • अध्याय 335 — छंदस्सु: प्रस्तार निरूपण: पिंगल छंद शास्त्र व मेरू प्रस्तार।
  • अध्याय 336 — शिक्षा निरूपण: वेदांग शिक्षा, स्वर व उच्चारण।
  • अध्याय 337 — काव्यादि लक्षण: काव्य भेद व रस प्रधानता।
  • अध्याय 338 — नाटक निरूपण: नाटक लक्षण, पूर्वरंग व संधि।
  • अध्याय 339 — श्रृंगारादि रस निरूपण: नवरस, स्थायी व सात्विक भाव।
  • अध्याय 340 — रीति निरूपण: वैदर्भी-गौडी आदि रीतियाँ व वृत्तियाँ।
  • अध्याय 341 — नृत्यादावंगकर्म निरूपण: नाट्य शास्त्र व विभिन्न हस्त मुद्राएँ।
  • अध्याय 342 — अभिनयादि निरूपण: आंगिक, वाचिक, आहार्य, सात्विक अभिनय।
  • अध्याय 343 — शब्दालंकाराः: अनुप्रास व चित्रबंध (पद्म, चक्र बंध)।
  • अध्याय 344 — अर्थालंकाराः: उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा आदि अलंकार।
  • अध्याय 345 — शब्दार्थयोः अलंकाराः: उभयालंकार व ध्वनि सिद्धांत।
  • अध्याय 346 — काव्यगुण विवेक: माधुर्य, ओज, प्रसाद आदि १८ गुण।
  • अध्याय 347 — काव्यदोष विवेक: काव्य दोष एवं उनका परिहार।
  • अध्याय 348 — एकाक्षर कोश: मातृका एकाक्षर बीजाक्षर कोश।
  • अध्याय 349 — कौमार व्याकरण: संज्ञा प्रकरण: कार्तिकेय उपदिष्ट व्याकरण व माहेश्वर सूत्र।
  • अध्याय 350 — संधि सिद्धरूप: स्वर, व्यंजन व विसर्ग संधि।
  • अध्याय 351 — सुप् विभक्ति सिद्धरूप (अजंत पुल्लिंग): अकारंतादि पुल्लिंग शब्द रूप।
  • अध्याय 352 — स्त्रीलिंग शब्द सिद्धरूप: रमा, नदी आदि स्त्रीलिंग रूप।
  • अध्याय 353 — नपुंसक शब्द सिद्धरूप: फल आदि नपुंसक रूप व युष्मद्-अस्मद्।
  • अध्याय 354 — कारक निरूपण: छः कारक (कर्ता, कर्म, करणादि)।
  • अध्याय 355 — समास निरूपण: छः मुख्य समास।
  • अध्याय 356 — तद्धित निरूपण: तद्धित प्रत्यय व शब्द निर्माण।
  • अध्याय 357 — उणादि सिद्धरूप: उणादि सूत्र व शब्द निष्पत्ति।
  • अध्याय 358 — तिङ् विभक्ति सिद्धरूप: १० लकार व धातु रूप (भू, एध)।
  • अध्याय 359 — कृत् सिद्धरूप: कृत् प्रत्यय व तव्य, अनीयर आदि।
  • अध्याय 360 — कोशेषु स्वर्ग पातालादि वर्गाः: अमरकोश: स्वर्ग, पाताल आदि वर्ग।
  • अध्याय 361 — अव्यय वर्ग: अव्यय शब्दों का कोश।
  • अध्याय 362 — नानार्थ वर्ग: एक शब्द के अनेक अर्थ।
  • अध्याय 363 — भूमि वनौषध्यादि वर्गाः: पृथ्वी, वन, औषधि पर्यायवाची।
  • अध्याय 364 — मनुष्य वर्ग: मानव अंग, आभूषण व वस्त्र कोश।
  • अध्याय 365 — ब्रह्म वर्ग: ब्राह्मण, यज्ञ व वेद शब्दावली।
  • अध्याय 366 — क्षत्र विट् शूद्र वर्गाः: क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र व सेना शब्दावली।
  • अध्याय 367 — सामान्य नामलिंगानि: न्याय-वैशेषिक प्रमाण व लिंग निर्णय।
  • अध्याय 368 — नित्य नैमित्तिक प्राकृत प्रलयाः: ४ प्रकार के प्रलय (नित्य, नैमित्तिक, प्राकृत, आत्यंतिक)।
  • अध्याय 369 — आत्यंतिक प्रलय गर्भोत्पत्ति निरूपण: त्रिदुःख व गर्भपिंड विकास।
  • अध्याय 370 — नरक निरूपण (भाग १): सांख्य तत्त्व: २४ सांख्य तत्त्व व ज्ञान-कर्मेंद्रियाँ।
  • अध्याय 371 — नरक निरूपण (भाग २): याम्यमार्ग: मृत्यु पश्चात यमलोक यात्रा व कर्मफल।
  • अध्याय 372 — यम नियमाः: अष्टांग योग के यम व नियम।
  • अध्याय 373 — आसन प्राणायाम प्रत्याहाराः: पद्मासन, प्राणायाम व प्रत्याहार।
  • अध्याय 374 — ध्यान निरूपण: साकार व निराकार विष्णु ध्यान।
  • अध्याय 375 — धारणा निरूपण: पंचभूत धारणाएँ (आग्नेयी, वारुणी आदि)।
  • अध्याय 376 — समाधि निरूपण: निर्विकल्प समाधि व आत्म-साक्षात्कार।
  • अध्याय 377 — ब्रह्म विज्ञानम: ‘अयमात्मा ब्रह्म’ महावाक्य विचार।
  • अध्याय 378 — पुनः ब्रह्म विज्ञानम (I): ‘अहं ब्रह्म परमं ज्योतिः’ अद्वैत भावना।
  • अध्याय 379 — पुनः ब्रह्म विज्ञानम (II): शब्दब्रह्म-परब्रह्म, ऋभु-निदाग संवाद।
  • अध्याय 380 — अद्वैत ब्रह्म विज्ञानम: जड़भरत आख्यान, सौवीर राजोपदेश, सर्वं विष्णुमयं।
  • अध्याय 381 — गीतासार: श्रीमद्भगवद्गीता का संपूर्ण सार।
  • अध्याय 382 — यमगीता: यमराज द्वारा नचिकेता को आत्मविद्या उपदेश, रथ रूपक।
  • अध्याय 383 — आग्नेयपुराण माहात्म्यम: श्री अग्नि महापुराण का संपूर्ण माहात्म्य, पाठ फल व ग्रन्थ समाप्ति।

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